लोन कितने प्रकार के होते है ?- What Types Of Loan In India hindi

जैसा कि आप लोगों को मालूम होगा की लोगों को अपनी तरह-तरह की जरूरतों को पूरा करने के लिए लोन अथवा कर्ज की आवश्यकता पड़ती है। जो वह किसी बैंक या फाइनेंसियल इंस्टिट्यूट से लेते हैं, और फिर लोन के द्वारा लिया गया रकम को ब्याज सहित उस बैंक या फाइनेंस इंस्टिट्यूट को वापस कर देते हैं। तो आज हम अपने लोन के प्रकार के इस पोस्ट के माध्यम से आप लोगों को यह बताने की कोशिश करते हैं कि  लोन कितने प्रकार के होते हैं?

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कॉरपोरेट लोन (Corporate Loan)

जब बैंक ऋण प्रदान करता है जब बड़े लोग (जैसे रतन टाटा, विजय माल्या, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टाटा बिड़ला) ऋण प्रदान करते हैं; तो उसे कॉर्पोरेट ऋण कहा जाता है। नियमों के मुताबिक, बैंक बड़ी कंपनियों को ऋण के रूप में कोर पूंजी (कोर पूंजी) का 55% प्रदान कर सकते हैं। लेकिन अब बैंक ऋण के रूप में अपनी पूंजी का 25% प्रदान करने में सक्षम होगा … जहां जोखिम से बचा जा सकता है।

इसके लिए, आपको 30 प्रतिशत यानी तीन लाख जमा करना होगा।  बाकी बैंक आपको पैसे देगा। गृह ऋण के लिए भुगतान करने का समय 5 साल से 20 साल तक है। गृह ऋण आवश्यकताओं में रुचि के अलावा, लागत के बारे में अधिक प्रकार हैं, जैसे: प्रसंस्करण लागत की लागत, कानूनी लागत मूल्यांकन लागत इत्यादि।

गोल्ड लोन (Gold Loan)

इस ऋण में, आप अपने सोने को बैंक लॉकर में रखकर ऋण प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे ऋणों में, आपके द्वारा सहेजे गए राशि को सोने की गुणवत्ता और उसके मूल्य के अनुसार दिया जाता है। आमतौर पर यह देखा गया है कि बैंक आपको ऋण के रूप में अपनी सोने की कीमत का 80% देता है। सोने के ऋण आमतौर पर आपात स्थिति में होते हैं। इस ऋण पर ब्याज व्यक्तिगत ऋण से कम है। वर्तमान में, एसबीआई में सोने के ऋण की ब्याज दर 11.15% और एचडीएफसी में 10% प्रति वर्ष है।

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होम लोन (Types Of Loan )

लोन के प्रकार

घर खरीदने के लिए जो लोन लिया जाता है उसे होम लोन कहते हैं। आप सिर्फ घर खरीदने के लिए ही लोन नहीं लेते हैं, बल्कि आप घर बनाने की कीमत मकान का रजिस्ट्रेशन स्टांप ड्यूटी का खर्च और भी बहुत सारे खर्च को जोड़ कर के आप बैंक से लोन ले सकते हैं। बैंक घर बनाने के कुल खर्च का 75%से 85% तक के लोन देता है। बाकी पैसो का जुगाड़ घर बनाने के लिए आपको खुद ही करना होता है। मान लीजिए आपने एक प्लॉट के लिए लोन लिया जिसकी कीमत 10 लाख रुपए है।

प्रॉपर्टी लोन (Types Of Loan )

प्रॉपर्टी लोन ऐसे लोन होते हैं जहां बैंक आपके संपत्ति पेपर को संग्रहीत करता है। यह ऋण 15 से अधिक वर्षों का हो सकता है। आमतौर पर, 40% संपत्ति की कीमतों में 50% तक का ऋण मिलता है।

Security Loan)

इस ऋण में, बैंक आपके सुरक्षा पत्र को ऋण प्रदान करता है। लेकिन सवाल उठता है कि क्या पेपर सुरक्षा? यदि आपने म्यूचुअल फंड में निवेश किया है, तो सरकारी योजनाओं या बॉन्ड की मांग, तो यह आपका सुरक्षा पत्र है जो आपको बैंक को ऋण देता है। यदि आप ऋण का भुगतान नहीं कर सकते हैं, तो बैंक आपके सुरक्षा पत्र लेता है, और बाजार पर बेचता है।

आप अपने सुरक्षा बंधक को बैंक में रख सकते हैं। बैंक आपको इस सुरक्षा पत्र के आधार पर दूर करने की अनुमति देता है। मसौदे के ऊपर मतलब है कि यदि आपके खाते में शून्य संतुलन है, तो आप अपने खाते से पैसे हटा सकते हैं, इसे अवधारणा कहा जाता है।

पर्सनल लोन (Personal Loan)

पर्सनल लोन या गैर जमानती लोन का मतलब ऋण खुद के लिए लिया जाता है। सभी ऋणों की बात करते हुए केवल अपने लिए लिया जाता है लेकिन व्यक्तिगत ऋण का मतलब है कि उनके व्यक्तिगत कार्यों के लिए ऋण लेना, जैसे कि बच्चों की स्कूल शुल्क या महंगे उपहार या घर खरीदना, इन सभी ऋणों को व्यक्तिगत ऋण के लिए लिया गया है। ।

दरअसल उनके लिए हर बैंक का अपना अपना ब्याज़ दर तय होता है। आज के समय में स्टेट bank of इंडिया(SBI) पर्सनल लोन के लिए 12.50% से 16.60% तक का सालाना ब्याज वसूल रहा है तो HDFC BANK 10.99% से 20.75% तक का सालाना ब्याज वसूल रहा है। वैसे पर्सनल लोन का ब्याज़ दर और सभी लोन से ज्यादा होता है। पर्सनल लोन के लिए बैंक आपसे ज्यादा डोकोमेंट नहीं मागती है बस आपकी सैलरी स्लिप देखकर आपको लोन दे देता हैं। पर्सनल लोन आपको पांच साल तक के लिए मिल सकता है।

Types Of Loan वाहन अथवा कार लोन (Car Loan)

जब आप कोई वाहन खरीदने के लिए बैंक से रकम लेते हैं तो; उसे वाहन अथवा कार लोन कहते हैं; कार लोन हर लोन की तरह ही फिक्स या फ्लोटिंग रेट पर दिया जाता है; फिक्स रेट का मतलब होता है जिस समय आप लोन ले रहे हैं; उस समय जो ब्याज दर है उस दर से आपको पूरी लोन का भुगतान करना होता है; और फ्लोरिंग रेट का मतलब होता है की लोन लेने के बाद अगर ब्याज घटता या बढ़ता है तो; आप को उस हिसाब से भुगतान करना होगा; कार लोन में जब तक आप पूरी लोन की रकम बैंक को वापस नहीं करते हैं तब; तक कार का मालिकाना हक बैंक के पास होता है।

एजुकेशन लोन ( लोन के प्रकार )

हर किसी छात्र के लिए असंभव नहीं है कि; वह अपने मनपसंद इंस्टीट्यूट में पढ़ाई कर पाए। कोई ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ना चाहता है; तो वहां की फीस ही इतनी है कि वह वहां जाकर पढ़ाई करने के बारे में सोचना; काफी मुश्किल काम है। ऐसी स्थिति में वह बैंक से एजुकेशन लोन ले सकता है; एजुकेशन लोन देने से पहले बैंक उसकी री पेमेंट निर्धारित करता है। बैंक लोन उसी स्टूडेंट को देती है; जिसे वापस करने की क्षमता रखते हैं।

स्टूडेंट की छमता को जानने के लिए बैंक दो तरह से काम करता है। या तो; स्टूडेंट के गार्जियन की इनकम को देखा जाता है या लोन लेने वाले स्टूडेंट किस यूनिवर्सिटी में जा रहे हैं; उसका परफॉर्मेंस कैसा है? यह भी  देखा जाता है। पढ़ाई पूरी होने के बाद स्टूडेंट लोन का पेमेंट कर सकता है; एजुकेशन लोन लेने के लिए एक गारंटर की जरुरत होती है। यह स्टूडेंट का कोई रिश्तेदार भी  हो सकता है; आज की डेट में state bank of India; एजुकेशन लोन 7.50 लाख से ऊपर के लिए 10.70% और 7.50 लाख तक के लिये 9.95% सालाना का ब्याज़ दर; चार्ज करती है। Types of Loans.

टाइम पीरियड की हिसाब से लोन तीन प्रकार के होते हैं

1.  शॉर्ट टर्म लोन (Short Term Loan) – इस लोन में पैसे लौटाने का समय; एक साल से कम होता है|

2. मीडियम टर्म लोन (Medium-Term Loan) – इस लोन में पैसे लौटाने का समय; 1 साल से 3 साल या 5 साल के बीच होता है

3. दीर्घकालिक (Long Term Loan) – इस लोन में पैसे लौटाने का समय 5 साल से अधिक होता है

तो आज आपने हमारे इस पोस्ट लोन के प्रकार के माध्यम से आपने जाना कि भारत में बैंक या फाइन इंस्टिट्यूट कितने तरह के लोन प्रदान करते हैं हमें आशा है कि अब आपको इस बात की जानकारी मिल गई होगी कि लोन कितने प्रकार के होते हैं। धन्यवाद॥

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