इंश्योरेंस (Insurance) क्या होता है?

बीमा ( Insurance ) उस साधन को कहते हैं जिसके द्वारा कुछ शुल्क (जिसे प्रीमियम कहते हैं); देकर हानि का जोखिम दूसरे पक्ष (बीमाकार या बीमाकर्ता) पर डाला जा सकता है; जिस पक्ष का जोखिम बीमाकर पर डाला जाता है उसे ‘बीमाकृत’ कहते हैं; बीमाकार आमतौर पर एक कंपनी होती है जो बीमाकृत के हानि या क्षति को बांटने को तैयार रहती है; और ऐसा करने में वह समर्थ होती है।बीमा एक प्रकार का अनुबंध (ठेका) है।

दो या अधिक व्यक्तियों में ऐसा समझौता जो कानूनी रूप से लागू किया जा सके; अनुबंध कहलाता है। बीमा अनुबंध का व्यापक अर्थ है कि; बीमापत्र (पॉलिसी) में वर्णित घटना के घटित होने पर; बीमा करनेवाला एक निश्चित धनराशि बीमा करानेवाले व्यक्ति को प्रदान करता है; बीमा करानेवाला जो सामयिक प्रव्याजि (बीमाकिस्त, प्रीमीयम) बीमा करनेवाले को देता रहता है, वही इस अनुबंध का प्रतिदेय है। ‘बीमा’ शब्द फारसी से आया है जिसका भावार्थ है – ‘जिम्मेदारी लेना’। डॉ॰ रघुवीर ने इसका अनुवाद किया है – ‘आगोप’। उसका अंग्रेजी पर्याय “इंश्योरेंस” (Insurance) है।

Insurance

बीमा वास्तव में बीमाकर्ता और बीमाकृत के बीच अनुबंध है जिसमें बीमाकर्ता बीमाकृत से एक निश्चित रकम (प्रीमियम) के बदले किसी निश्चित घटना के घटित होने (जैसे कि एक निश्चित आयु की समाप्ति या मृत्यु की स्थिति में) पर एक निश्चित रकम देता है या फिर बीमाकृत की जोखिम से होने वाले वास्तविक हानि की क्षतिपूर्ति करता है।

बीमा के आधार के बारे में सोचने पर पता चलता है कि बीमा एक तरह का सहयोग है जिसमें सभी बीमाकृत लोग, जो जोखिम का शिकार हो सकते हैं, प्रीमियम अदा करते हैं जबकि उनमें से सिर्फ कुछ (बहुत कम) को ही, जो वास्तव में नुकसान उठाते हैं, मुआवजा दिया जाता है। वास्तव में जोखिम की संभावना वालों की संख्या अधिक होती है लेकिन किसी निश्चित अवधि में उनमें से केवल कुछ को ही नुकसान होता है। बीमाकर्ता (कंपनी) बीमाकृत पक्षों के नुकसान को शेष बीमाकृत पक्षों में बांटने का काम करती है।

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बीमा (Insurance) कितने तरह का होता है?

आम तौर पर बीमा दो तरह का होता है:
जीवन बीमा (Life Insurance)
साधारण बीमा (General Insurance)

Life Insurance क्या है?

जीवन बीमा सबसे ज़रूरी वित्तीय साधनों में से एक साधन है जो आपके परिवार को वित्तीय रूप से स्वतंत्र रहने, ऋण के रूप में ली गई देनदारियों को दूर करने, जीवनशैली को बनाए रखने और जीवन के ज़रूरी लक्ष्यों को सही रास्ते पर बनाए रखने में बेहद ही उच्च स्तर तक मदद करता है.

बीमा पॉलिसी अवधि के भीतर पॉलिसीधारक की समय से पहले निधन के मामले में, बीमा कंपनी नामित व्यक्ति के परिवार को बीमा राशि का भुगतान करती है.

जीवन बीमा के प्रकार —

1. संपूर्ण जीवन बीमा (Whole Life Insurance)
2. टर्म जीवन बीमा (Term Life Insurance)
3. बंदोबस्ती की योजना (Endowment Plan)
4. मनी-बैक नीति (Money-back Policy)
5. यूनिट लिंक्ड बीमा योजना (Unit linked Plans)

1. संपूर्ण जीवन बीमा –

यह एक प्रकार की बीमा योजना है. जो आपके संपूर्ण जीवन के लिए एक सुरक्षा प्रदान करती है. ऐसी योजनाओं के लिए बीमा पॉलिसी की अवधि करीब-करीब 100 साल तक होती है. ऐसी पॉलिसी का जब तक प्रीमियम का भुगतान किया जाता है, तब तक पॉलिसी के बेनेफिट्स यानी की लाभ बने रहते है. यदि कोई जीवन भर के लिए इस बीमा योजना को बरकरार रखना चाहता हैं तो संपूर्ण जीवन बीमा यानी Whole Life Insurance योजना लेना एक बहुत अच्छा ऑप्शन है.

2. टर्म जीवन बीमा –

टर्म जीवन बीमा, एक शुद्ध सुरक्षा योजना है जो की एक सस्ती प्रीमियम पर एक बड़ा कवरेज प्रदान करती है. Term Insurance में बीमा पॉलिसी की तय अवधि के भीतर बीमा धारक के निधन के मामले में सुनिश्चित राशि का भुगतान बीमा कंपनी द्वारा किया जाता है. प्राप्त बीमा राशि बीमा धारक के परिवार को उनके दैनिक खर्चों को पूरा करने और ऋण का भुगतान करने में मदद करती है. टर्म प्लान किसी व्यक्ति की वार्षिक आय की 15-20 गुना राशि का बीमित राशि चुनने की सुविधा देता है.

3. बंदोबस्ती की योजना –

बंदोबस्ती की योजना, किसी एक उत्पाद में निवेश और बीमा की योजना है जो जीवन को कवर करने के साथ-साथ आवश्यक जीवन लक्ष्यों के लिए काम आती हैं. इस योजना में प्रीमियम का एक निश्चित हिस्सा बीमित राशि के रूप में जाता है, जबकि बाकी हिस्से को कम जोखिम वाले रास्ते यानी किसी व्यापार में निवेश किया जाता है.

बीमा पॉलिसी की अवधि के दौरान बीमाकर्ता के निधन के मामले में, बीमकर्ता के नॉमीनी को बीमा की राशि प्राप्त होती है। यह बंदोबस्ती योजना, बीमा और निवेश दोनो की जरूरतों को एक साथ पूरा करती है.

4. मनी-बैक नीति –

इस योजना में बीमा पॉलिसी की अवधि के दौरान पूर्व-निर्धारित अंतराल पर एक निश्चित राशि का भुगतान किया जाता है, बाकी यह, मनी बैक पॉलिसी बंदोबस्ती की योजना वाली बीमा के समान हैं। जैसे की, यदि 20 साल की अवधि के लिए मनी-बैक पॉलिसी ली जाती है तो बीमा पॉलिसी अवधि के 5वें, 10वें और 15वें वर्ष के अंत में एक निश्चित राशि का भुगतान मिल सकता है, और इस बीमा पॉलिसी के पूरा होने पर, संचित बोनस के साथ पूरे लाभ का भुगतान नील जाता है.

5. यूनिट लिंक्ड बीमा योजना (ULIPs) –

इसमे भी बंदोबस्ती की योजना की तरह, प्रीमियम का एक निश्चित हिस्सा लाइफ कवर देने में जाता है और दूसरा हिस्सा रिटर्न कमाने के लिए बाजारों में लगाया जाता है. यह योजना, किसी एक उत्पाद में निवेश और बीमा के साथ-साथ जीवन सुरक्षा और कई तरह के जोखिम वाले फंडो में निवेश करके पूंजी से पूंजी कमाने का अवसर प्रदान करती हैं.

यूलिप योजना, मनी बॅक बीमा योजना की तरह काम करती है, और साथ में स्विचिंग की सुविधा यानी एक फंड से दूसरे में निवेश करने की सुविधा, भी प्रदान करती हैं.

सामान्य बीमा (General Insurance) क्या है?

सामान्य बीमा में, जीवन बीमा के विपरीत निर्जीव संपत्ति जैसे घर, वाहन, स्वास्थ्य, यात्रा, बाढ़, आग लगना, चोरी, सड़क दुर्घटना और मानव निर्मित आपदाओ की बीमा शामिल होती है.

1. होम बीमा (Home Insurance)
2. मोटर बीमा (Motar Insurance)
3. यात्रा बीमा (Travel Insurance)
4. स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance)

1. होम बीमा – 

घर बीमा पॉलिसी, आपके घर और उसके सामान को किसी इंसान और प्राकृतिक आपदा के कारण से हुए नुकसान से बचाती है. दोस्तों कुछ होम इंश्योरेंस पॉलिसी, आपके घर के नवीकरण के दोरान आपको अस्थायी किराए के खर्च के लिए कवरेज देती हैं.

2. मोटर बीमा –

जैसा की नाम से ही पता चल रहा है यह बीमा वाहनो के लिए होती है जो वाहनों की दुर्घटना, वाहन की क्षति, वाहन की चोरी, वाहन के साथ तोड़-फोड़ आदि सब होने पर, आपको कवरेज प्रदान करती है.

यह बीमा दो तरहो से होती है, थर्ड पार्टी और व्यापक, जिसमे थर्ड पार्टी मोटर बीमा आपके वाहन के कारण हुई किसी के साथ दुर्घटना के मामले में, तीसरे पक्ष के नुकसान की देखभाल करता है. मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के अनुसार, सड़क पर चलने वाले प्रत्येक वाहन के लिए थर्ड-पार्टी बीमा होना अनिवार्य है.

दूसरी ओर, व्यापक मोटर बीमा पॉलिसी, बाढ़, आग, दंगा, आदि के कारण होने वाले नुकसान पर, आपको तीसरे पक्ष के नुकसान और स्वयं के नुकसान दोनों से कवर करती है.

3. यात्रा बीमा – 

यदि आप विदेश यात्रा कर रहे हैं तो एक यात्रा बीमा पॉलिसी आपको सामान के नुकसान, उड़ान में हुई देरी और यात्रा रद्द होने के कारण होने वाली क्षति से बचाती है. कुछ मामलों में, यात्रा के दोरान आप अस्पताल में भर्ती होते हैं तो यात्रा बीमा के चलते आपको अस्पताल में बीमा कंपनी के द्वारा संपूर्ण उपचार करवाया जाता है.

4. स्वास्थ्य बीमा – 

स्वास्थ्य बीमा किसी मेडिकल इमरजेंसी होने पर इससे होने वाले जेब खर्च से बचाता है. एक स्वास्थ्य बीमा योजना एक क्षतिपूर्ति योजना है जो अस्पताल में भर्ती होने पर होने वाले खर्च के लिए भुगतान करती है.

इस योजना में, पूरे परिवार की एक साथ बीमा पॉलिसी भी की जाती है जिससे परिवार के किसी भी सदस्य के इलाज के लिए कवरेज मिलती है. दूसरी ओर, गंभीर बीमारी की योजनाएं जो निश्चित लाभ वाली योजनाएं होती हैं जिससे किसी ख़ास तरह की बीमारी के निदान के लिए एक बड़ी राशि मिलती हैं|

बीमा की विशेषताएँ एवं प्रकृति

1. जोखिम से सुरक्षा – बीमा जोखिमों से का सशक्त उपाय है। जीवन में व्याप्त सभी अनिश्चितताओं से व्यक्ति को चिन्तामुक्त करता है। ये जोखिमें जीवन , स्वास्थ्य, अधिकारों तथा वित्तीय साधनों, सम्पत्तियों से सम्बन्धित हो सकती है। अत: इन सभी जोखिमों से सुरक्षा का एक उपाय बीमा ही है।

2. जोखिमों को फैलाने का तरीका – बीमा में सहकारिता की भावना के आधार पर “एक सब के लिए व सब एक के लिए कार्य किया जाता है। समान प्रकार की जोखिमों से घिरे व्यक्तियों को एकत्रित कर एक कोष का निर्माण किया जाता है ताकि एक व्यक्ति की जोखिम समस्त सदस्यों में बँट जाये व किसी एक सदस्य को जोखिम उत्पन्न होने पर उस कोष से उस सदस्य विशेष को भुगतान कर दिया जाता है।

3. जोखिम का बीमितों से बीमाकर्ता को हस्तान्तरण –

बीमा में समस्त बीमितों की जोखिमों को बीमाकर्ता को अन्तरण कर दिया जाता है। बीमाकर्ता द्वारा बीमित को हानि होने पर निश्चित भुगतान कर दिया जाता है।

4. बीमा एक प्रक्रिया – बीमा एक प्रक्रिया भी है जो पूर्व निर्धारित विधि से संचालित की जाती है। पहले बीमित अपनी जोखिम का अन्तरण बीमाकर्ता को निश्चित प्रीमियम के बदले करता है तत्पश्चात् बीमा कर्तव्यता द्वारा उस जोखिम के विरूद्ध सुरक्षा प्रदान की जाती है।

5. बीमा एक अनुबन्ध –

बीमा में वैधानिकता का गुण होने से यह एक वै ध अनुबन्ध है। इसमें बीमित द्वारा बीमाकर्ता को प्रस्ताव दिया जाता है व बीमाकर्ता द्वारा स्वीकृति दे ने पर निश्चित प्रतिफल (प्रीमियम) के बदले दोनों के मध्य एक वैध अनुबन्ध निर्मित होता है। जिसमें एक निश्चित घटना के घटित होने पर बीमाकर्ता उसकी हानि की पूर्ति करने का वचन दे ता है।

6. बीमा सहकारी तरीका है – बीमा सहकारिता की भावना पर आधारित है। समान प्रकार की जोखिमों से घिरे व्यक्ति एक निश्चित कोष में अंशदान करते है , उसमें से किसी भी सदस्य को जोखिम उत्पन्न होने पर उस कोष से भुगतान कर दिया जाता है। इस प्रकार “सब एक के लिए व एक सब के लिए की भावना पर कार्य किया जाता है।

7. हानियों’ जोखिमों को निश्चित करना –

बीमा में जोखिमों को समाप्त नहीं किया जा सकता है , परन्तु जोखिमों की अनिश्चितता को कम व निश्चित अवश्य किया जाता है। बीमित द्वारा बीमा कम्पनी को जोखिमों का अन्तरण किया जाता है व एक निश्चित प्रतिफल / प्रीमियम से उस जोखिम का मू ल्य निश्चित कर दिया जाता है। अर्थात् निश्चित प्रीमियम के बदले अनिश्चित हानियों को बीमा कम्पनी द्वारा मिलने वाली बीमा राशि के रूप में निर्धारित कर दिया जाता है। यही राशि बीमा दावा राशि कहलाती है।

8. घटना के घटित होने पर ही भुगतान – बीमा में घटना के घटित होने पर ही भुगतान किया जाता है। जीवन बीमा में घटना का घटित होना निश्चित है , जैसे – व्यक्ति की मृत्यु होना , किसी विशेष बीमारी से ग्रसित होना, बीमा अवधि का पूर्ण हो जाना तो ऐसी स्थिति में बीमित को भुगतान होता ही है। परन्तु सामान्य बीमों में घटना के घटित होने पर ही भुगतान होगा अन्यथा बीमित भुगतान हेतु उत्तरदायी नहीं माना जायेगा।

9. जोखिम का मूल्यांकन व निर्धारण –

बीमा में जोखिम का मू ल्यांकन बीमा अनुबन्ध के पूर्व ही कर लिया जाता है। जोखिम की राशि व जोखिम के उत्पन्न होने की सम्भावना के आधार पर प्रीमियम का पूर्व निर्धारण कर लिया जाता है। इस निश्चित प्रतिफल / प्रीमियम के बदले निश्चित जोखिम उत्पन्न होने पर निश्चित बीमित राशि का भुगतान किया जाता है।

10. भुगतान का आधार – जीवन बीमा में विनियोग तत्व निहित होता है अत: पक्षकार की मृत्यु होने अथवा अवधि पूर्ण होने पर निश्चित राशि का भुगतान बीमित को कर दिया जाता है। परन्तु अन्य बीमा में वास्तविक क्षति के बराबर ही भुगतान किया जायेगा। यह क्षति अनुबन्धानुसार बीमित कारणों से जोखिम उत्पन्न होने पर व बीमित राशि की सीमा में ही भुगतान किया जायेगा उससे अधिक राशि का भुगतान नहीं।

11. व्यापक क्षेत्र –

बीमा का क्षेत्र अब बहुत विस्तृत हो गया है। पहले केवल जीवन बीमा, समुद्री बीमा व अग्नि बीमा का ही बीमा होता था पर अब परम्परागत जोखिमों के साथ गैर परम्परागत जोखिमों का भी बीमा किया जाता है। अब विविध बीमा का क्षेत्र बहुत व्यापक हो गया है। इसमे चोरी बीमा दुर्घटना बीमा, पशुधन बीमा, फसल बीमा आदि अनेक प्रकार बीमों को सम्मिलित किया गया किया गया है।

12. संस्थागत ढांचा – सम्पूर्ण विश्व में बड़ी-बड़ी संस्थाएं बीमा कार्य में लगी हुई है। भारत में जीवन बीमा निगम, सामान्य बीमा निगम एवं उसकी चार सहायक कम्पनियां व कई निजी कम्पनियां बीमा के कार्य में लगी है।

13. बीमा जुआ नहीं है – बीमा में वास्तविक क्षति के बराबर ही क्षतिपूर्ति या सामान्य क्षति होने पर ही क्षति पूर्ति की जाती है , अत: बीमा की तुलना जुए से करना गलत है। जुए में एक पक्षकार लाभ में तो दूसरा पक्षकार हमे शा हानि में ही रहता है परन्तु बीमा में ऐसा नहीं होता है।

14. बीमा दान नहीं , अधिकार है – बीमा में बीमित द्वारा अंशदान दे कर अधिकार प्राप्त किया जाता है अनुबन्धात्मक सम्बन्धों के आधार पर बीमाकर्ता निश्चित प्रतिफल (प्रीमियम) के बदले बीमित को निश्चित समयावधि पश्चात् बीमा धन / दावा का भुगतान करता है।

15. सामाजिक समस्याओं के निवारण का उपाय –

समाज में व्याप्त अनेक सामाजिक समस्याओं का निवारण बीमा के द्वारा किया जाता है क्योंकि बीमा से समाज की अनिश्चितताओं को निश्चिताओं में व जोखिमों को कम किया जाता है।

16. बीमा कानून अनिवार्य – आधुनिक युग में बीमा का क्षेत्र विस्तृत होता जा रहा है इसके साथ ही; सरकारों का कर्तव्य होता जा रहा है कि बीमा से सम्बन्धित नियामक अधिनियम बनाये; भारत में भी जीवन बीमा, समुद्री बीमा , साधारण बीमा हेतु अधिनियम बनाये गये हैं; इसके अतिरिक्त बीमा नियन्त्रण एवं विकास प्राधिकरण” द्वारा सम्पूर्ण बीमा व्यवसाय का नियमन एवं नियन्त्रण किया जाता है।

17. बीमा सिद्धान्तों की अनिवार्यता – बीमा अनुबन्ध हेतु कुछ सिद्धान्तों का होना अनिवार्य है। इनमें बीमा योग्य हित; परम सदविश्वास का सिद्धान्त, सहकारिता व संभाविता आदि मुख्य सिद्धान्त है; बीमा योग्य हित के सिद्धान्त के अभाव में बीमा जुए के समान माना जायेगा।

18. वैध सम्पत्तियों / कार्यों का ही बीमा – बीमा केवल वैध सम्पत्तियों का किया जा सकता है। चोरी, डकैती, तस्करी; आदि के सामान का बीमा नही करवाया जा सकता है।

19. बीमितों की बड़ी संख्या का होना – एक ही प्रकार की जोखिम से घिरे व्यक्तियों का जितना बड़ा समूह होगा; उतना ही बीमितों को कम प्रीमियम के बदले सुरक्षा प्राप्त होगी।

20. हानि बीमित के नियन्त्रण के बाहर हो – अज्ञात व अनिश्चित हानियों का ही बीमा करवाया जा सकता है; हानि होगी अथवा नहीं होगी, हानि की गहनता व तीव्रता क्या होगी ये सभी नियन्त्रण से बाहर होनी चाहिये

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बीमा का महत्त्व

सभ्यता के विकास के साथ-साथ बीमा का महत्व भी बढ़ता जा रहा है; Because जोखिमों, दुर्घटनाओं व अनिश्चितताओं , में वृद्धि होती जा रही है; आज हम ऐसे किसी दे श की कल्पना नहीं कर सकते जो बीमा का लाभ नहीं उठा रहा हो; आज बीमा प्रारम्भिक स्वरूप से हट कर; सामाजिक व व्यावसायिक जगत के प्रत्येक क्षेत्र में पदार्पण कर चुका है; और अपनी उपयोगिता के आधार पर लोकप्रियता प्राप्त करता जा रहा है; बीमा की उपयोगिता से प्रभावित होकर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर विन्स्टन चर्चिल ने कहा था; “यदि मेरा वश चले तो मैं द्वार-द्वार पर यह अंकित करा दूं कि बीमा कराओ।”

बीमा सम्पूर्ण मानवजाति एवं इससे सम्बन्धित सभी वर्गों को सामाजिक एवं आर्थिक रूप से लाभ पहुँचाता है संक्षेप में; कह सकते है कि आधुनिक युग में बीमा का महत्व दिन दुगुना रात चौगुना होता चला जा रहा है; बीमा के महत्व अथवा लाभों को निम्नांकित वर्गीकरण द्वारा समझा जा सकता है।

इंश्योरेंस के फायदे —

आज हर कोई इंसान अपने और अपने प्रियजनो के जीवन को सुरक्षित रखने के लिए बीमा करवाता है; जीवन बीमा पॉलिसी एक संरक्षण प्रदान करती है; बीमा लेना एक तरह से बचत करने का एक बढ़िया तरीका है; और आप अपनी बीमा पॉलिसी की गारंटी देकर किसी भी बॅंक से लोन लिए भी आवेदन कर सकते है।

वही सामान्य बीमा की बात करे तो यह एक तरह से वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है; इसमे हम किसी चीज़ का बीमा करवा सकते है; Because आज किसी भी चीज़ का कोई भरोसा नही है; कभी भी कोई भी दुर्घटना हो सकती है; इस बीमा के चलते हम आने वाली कोई भी समस्या को आसानी से नियंत्रण कर सकते है।

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इंश्योरेंस कैसे ले —

इंश्योरेंस लेने के लिए ऐसे काफ़ी तरीके है; जैसे की किसी बीमा कंपनी के बीमा एजेंट से बीमा करवाना; किसी बीमा कंपनी मे खुद जा कर बीमा करवाना; किसी बीमा कंपनी की वेबसाइट से ऑनलाइन बीमा करवाना; ऑनलाइन ब्रोकर वेबसाइट पर रिजिस्टर करके बीमा करवाना आदि|

ज़रूरत पड़ने पर इन सभी तरीक़ो से की गयी बीमा पॉलिसी को हम क्लेम कर सकते है; यानी उस बीमा पॉलिसी से सम्बंधित कोई नुकसान होने पर; जिसके लिए हमने बीमा करवा के रखा है; बीमा कंपनी से बीमा के एवज में मिलने वाली राशि के लिए मांग कर सकते है।

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