Provident Fund क्या है? – Provident Fund से Loan कैसे लेते हैं जानिए हिंदी में |

दुनिया में ऐसे बहुत से लोग है,  जो सरकारी या प्राइवेट प्राप्त कर कर लेते है, क्योंकि जीवन में नौकरी का बहुत अधिक महत्व होता है | जिन लोगों को नौकरी प्राप्त हो जाती है, तो उन लोगों का जीवन भी सुरक्षित हो जाता है, और वहीं जिन लोगों को सरकारी नौकरी प्राप्त हो जाती है | उन्हें फिर अपने जीवन में नौकरी को लेकर किसी भी प्रकार की कोई भी समस्या नहीं होती है, क्योंकि सरकारी नौकरी प्राप्त करने का मतलब भविष्य में कहीं भी आपको किसी दूसरी नौकरी के लिए भटकना नहीं पड़ता है |

इसलिए अधिकतर लोग अपने जीवन में सरकारी प्राप्त करने की पूरी कोशिश करते है | इसके साथ ही सरकारी या प्राइवेट नौकरी करने वाले व्यक्तियों को वर्तमान के साथ-साथ भविष्य के लिए भी कई सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाती है | इसी तरह एक Provident Fund होता है।

यह एक ऐसा फण्ड होता है, जिसके विषय में हर नौकरीपेशा व्यक्ति जानकारी रखने की कोशिश करता है, क्योंकि इस रकम के आधार पर ही हर वर्किंग पर्सन अपने रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी को आगे  बढ़ाने के लिए प्लान कर पाता है।

पीएफ फंड सरकारी या प्राइवेट नौकरी करने वालों (जहाँ 20 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हो) व्यक्तियों की सैलरी से काटा जाता है और बाद में उन्हें यह पीएफ वापस भी कर दिया जाता है| प्रोविडेंट फण्ड (PF) को एम्प्लोयी प्रोविडेंट फण्ड या ईपीएफ (EPF) भी कहाँ जाता है | इसलिए यदि आपको प्रोविडेंट फण्ड के विषय अधिक जानकारी नहीं प्राप्त है और आप प्रोविडेंट फण्ड के विषय में जनना चाहते है, तो यहाँ पर आपको प्रोविडेंट फण्ड क्या होता है , PF Explained in Hindi ,पीएफ के नियम, लाभ क्या है ? इसकी पूरी जानकारी प्रदान की जा रही है |

प्रोविडेंट फण्ड (Provident Fund) का मतलब क्या होता है ?

प्रोविडेंट फण्ड या पीएफ एक प्रकार का रिटायरमेंट फण्ड होता है, जो प्रमुख रूप से रिटायरमेंट के बाद की जरूरतों को पूरा करने के लिए लोगों  प्रदान किया जाता है। इसके अलावा इस फंड को  सोशल सिक्योरिटी कवर भी कहा जाता है |  यह पीएफ फंड सामान्य तौर पर किसी सरकारी या प्राइवेट फर्म में काम करने वाले कर्मचारी की बेसिक सैलरी +DA का 12%  हिस्सा काट लिया जाता  है , लेकिन यह फंड उन कंपनियों पर लागू किया जाता  है , जिन कंपनियों में कुल कर्मचारियों की संख्या 20 से भी अधिक होती है |

महीने की आय से प्रॉविडेंट (Provident Fund) की कटौती

जब आप एक कंपनी में काम करना शुरू करते है तो आप और आपकी कंपनी दोनों को आपकी मासिक आय का १२% EPF खाता में डालना होता है। आपके हिस्से का १२% EPF खाता में सीधे जमा हो जाता है , लेकिन कंपनी के १२% में से ३.६७% EPF और बाकी ८.३३% EPS (Employee Pension Scheme) में जाता है। यानि, अगर आपका मासिक आय ५०,००० है तो उसके १२% के हिसाब से आपके ६,००० रूपए सीधे आपके EPF खाते में जाएंगे और कंपनी की तरफ से १८३५( ३.६७ % ) EPF में और बाकी ४१६५ रुपए (८. ३३ %) EPS (एम्प्लायर पेंशन स्कीम) में जाएगें।

यदि आपकी बेसिक तनख्वाह ६,५०० से अधिक है तो आपकी कंपनी द्वारा अधिक से अधिक ६,५०० का ८.३३ % ही यानि ५४१ रुपये ही EPS में जमा किए जाएंगे और बाकी पैसा EPF में चला जाएगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दे की EPF पर आपको वार्षिक ब्याज मिलता है, जिसका दर सरकार और सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ ट्रस्टी तय करती है।

वर्तमान समय में ये दर ८. ७५ है।

पीएफ (PF) के लाभ 

पीएफ के लिए किसी को नॉमिनी बनाया जा सकता है ?

यदि कंपनी आपका पीएफ काटता है, तो आप अपने पीएफ के लिए परिवार के किसी सदस्य को नॉमिनी बना सकते है, जो EPF अकाउंट होल्डर की मृत्यु की स्थिति में पीएफ में जमा रकम का हकदार होगा या होगी |

लाख तक का इंश्योरेंस करा सकते है ?

यदि आप किसी बड़ी  कंपनी में काम करते हैं और आपका  प्रोविडेंट फण्ड  काटा लिया जाता है, तो आपको आपके अकाउंट पर बाई डिफॉल्ट बीमा मिलता भी प्राप्त हो सकता है। इसलिए आपको  EDLI (एंप्लॉई डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस) योजना के तहत आपके पीएफ अकाउंट पर 6  लाख रुपये तक इंश्योरेंस उपलब्ध कराया जाता है। आप इसका लाभ  किसी बीमारी, एक्सीडेंट या मृत्यु की स्थिति में बहुत ही आसानी के साथ उठा सकते है |

पीएफ (PF) के नियम

किसी भी कंपनी में काम करने पर  आप और  आपकी कंपनी दोनों को आपकी मासिक आय का 12% EPF खाता में डालना होता है, जिसके बाद आपके हिस्से का 12% EPF सीधे आपके खाता में  जमा हो जाता है , लेकिन कंपनी के 12% में से 3.67% EPF और बाकी 8. 33% EPS (Employee Pension Scheme) में भेज दिया जाता है | इसका मतलब यह है कि , यदि आपकी मासिक आय 50,000 है तो उसके 12% के हिसाब से आपके 6,000 रूपए सीधे आपके EPF खाते में कंपनी द्वारा भेज दिए जाएंगे और कंपनी की तरफ से 1835( 3.67 % ) EPF में और शेष 4145 रुपए (8. 33%) EPS (एम्प्लायर पेंशन स्कीम) में जाएगें।  

इनएक्टिव अकाउंट पर भी ब्याज भी प्राप्त हो सकता है 

यदि आपका  पीएफ अकाउंट 3  साल से अधिक समय तक निष्क्रिय है, तो आप  उन पर भी ब्याज ले सकते है | इसलिए  ऐसे में नौकरी बदलते समय पीएफ अकाउंट भी ट्रांसफर करा लेना आवश्यक होता है,  ताकि आप नियमित राशि पर ब्याज प्राप्त कर सके, लेकिन यदि आप ऐसा  नहीं करते है, तो आपको 5 साल से अधिक  समय अकाउंट इनएक्टिव रहने पर विथड्रॉल के समय टैक्स चुकाना पड़ सकता है |

ईपीएफ पर प्राप्त हो सकती हैं पेंशन ?

यदि आप पीएफ अकाउंट में जमा होने वाली राशि का कुछ हिस्सा पेंशन अकाउंट में भी ट्रांसफर करना चाहते हैं तो आपकी राशि का कुछ हिस्सा पेंशन अकाउंट में भी ट्रांसफर किया जा सकता है। यदि आप ऐसा करते हैं, तो कुछ टर्म एंड कंडीशन के तहत एक समय सीमा के बाद आप पेंशन भी प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए आपकी न्यूनतम आयु 58  वर्ष होनी चाहिए और आपका सेवाकाल कम से कम 10  साल का होना जरूरी होता है और यदि आप 10  साल से पहले आप पीएफ निकाल चुके हैं तो आप पेंशन नहीं प्राप्त कर सकते है 

Provident Fund
Provident Fund

प्रोविडेंट फण्ड के प्रकार 

वैधानिक प्रोविडेंट फण्ड (Statutory Provident Fund)

वैधानिक प्रोविडेंट फण्ड सरकारी संसथान, विश्वविद्यालय पर लागू होता है। इन्हे सरकारी भविष्य निधि भी कहा जाता है। वो कर्मचारी जो ऐसे संसथान में काम करते है, वह वैधानिक प्रॉविडेंट फण्ड लेने के योग्य होते हैं।

मान्यताप्राप्त प्रोविडेंट फण्ड (Recognized Provident Fund )

इस तरह के प्रोविडेंट फण्ड उन संस्थाओ के अंतर्गत आता है जहाँ २० या २० से अधिक कर्मचारी काम करते हो, जाहिर है अधिकतम कर्मचारी मान्यताप्राप्त प्रोविडेंट फण्ड के अंदर ही आते हैं। सारे मान्यताप्राप्त प्रोविडेण्ट फण्ड योजना को आय कर अधिकारी द्वारा मंज़ूरी मिलना अनिवार्य है।

अमान्यताप्राप्त (Unrecognized Provident Fund)

अमान्यताप्राप्त प्रोविडेंट फण्ड को आय कर अधिकारी द्वारा मान्यता प्राप्त नही होती। इसके अंतर्गत नियोक्ता और कर्मचारी दोनों मिल के इसकी शुरुआत करते हैं। RPFs की तुलना में इनका कर उपचार अलग हो सकता है।

सार्वजनिक प्रोविडेंट फण्ड ( Public Provident Fund)

इसके अंतर्गत कर्मचारी को ये छूट है कि वह किसी पोस्ट ऑफिस या बैंक जैसे: ICICI, SBI में खता खोल के सालाना ७०,००० तक का योगदान दे सकता है। यह योजना उन लोगो के लिए एक बेहतरीन रिटायरमेंट योजना साधन है, जो किसी पेंशन योजना के तहत नहीं आते। सार्वजनिक प्रोविडेन्ट फण्ड अनुभाग ८० C के तहत कर लाभ प्रदान करता है और कमाए हुए ब्याज में भी कर की छूट मिलती है। इस योजना की अवधी १५ साल तक की है। यह सरकार द्वारा निर्धारित सबसे लोकप्रिय योजना है।

भविष्य निधि / प्रोविडेंट फण्ड (Provident Fund) एक लम्बी अवधी का निवेश है , जिसमे हर तरह के लोग अपनी राशि जमा करते है और, क्योंकि ये सरकार की तरफ से दी जाने वाली सेवा है इसलिए इसमें कोई जोखिम भी नहीं होता।

Provident Fund
Provident Fund

प्रोविडेंट फंड के बारे में ज्यादातर लोग जानते हैं. लेकिन, अक्सर कन्फ्यूज होते हैं कि एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड (EPF) और पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) एक है. इसलिए जरूरी है यह समझा जाए कि इनमें अंतर क्या है. लेकिन, इससे पहले ये भी जान लीजिए एक और तरह का प्रोविडेंट फंड होता है जनरल प्रोविडेंट फंड (GPF). कुल मिलाकर 3 तरह के प्रोविडेंट फंड होते हैं. तीनों में बहुत अंतर होता है. सरकार समय-समय पर तीनों की ब्याज दर में बदलाव करती है. 

क्या है तीनों में अंतर?

PF पर हर वित्त वर्ष के लिए सालाना ब्याज दर तय की जाती है. वहीं, PPF के लिए हर तिमाही पर ब्याज दर तय होती है. दरअसल, एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड (EPF) की ब्याज दर EPFO तय करता है और उसकी मंजूरी वित्त मंत्रालय से ली जाती है. वहीं, पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) सरकार की छोटी बचत योजनाओं के तहत आने वाली स्कीम है, इसलिए हर तिमाही आधार पर इसके ब्याज में बदलाव होता है. वहीं, जनरल प्रोविडेंट फंड की बात करें तो यह सरकारी कर्मचारियों के लिए है. इस पर भी ब्याज दर तिमाही आधार पर तय होती है.

क्या होता है EPF?

कर्मचारी भविष्य निधि या एम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड (EPF) एक निवेश योजना है, जो हर नौकरीपेशा को दी जाती है. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) सभी ईपीएफ खातधारकों के अंशदान का रखरखाव करता है. ईपीएफ सरकारी और गैर सरकारी सभी कर्मचारियों के लिए निवेश स्कीम है. नियमों के मुताबिक, जिस कंपनी में 20 से अधिक कर्मचारी होते हैं, उसका रजिस्ट्रेशन EPFO में होना जरूरी है. EPF की राशि हर कर्मचारी की सैलरी से काटी जाती है. बेसिक सैलरी का 12 फीसदी कर्मचारी के वेतन से EPF में जमा होता है. 12 फीसदी कंपनी भी देती है, जिसमें 8.33 फीसदी आपके पेंशन स्कीम (EPS) अकाउंट में और बाकी 3.67 फीसदी EPF में जमा होता है. फिलहाल, EPF पर 8.65 फीसदी ब्याज मिलता है.

 EPF ब्याज दर

EPF पर लागू ब्याज दर की सालाना समीक्षा की जाती है। फाइनेंशियल वर्ष, 2021-22 के लिए EPF ब्याज दर 8.50% है। EPFO एक वित्तीय वर्ष के लिए ब्याज दर निर्धारित करता है और हर महीने EPF अकाउंट में मौजूदा बैलेंस पर ये ब्याज लगाया जाता है, लेकिन अकाउंट में ब्याज वर्ष के अंत में ट्रान्सफर होता है।

जिस वर्ष नई ब्याज दरों की घोषणा की जाती है वह अगले फाइनेंशियल वर्ष के लिए वैलिड रहती हैं अर्थात् 1 अप्रैल से 31 मार्च तक। EPF ब्याज दर के बारे में जानने के लिए यहां कुछ महत्वपूर्ण तथ्य दिए गए हैं::

  • ब्याज दर 50% है और यह केवल अप्रैल 2021 से मार्च 2022 के दौरान किए गए EPF डिपॉज़िट पर लागू होगी
  • ब्याज की कैल्कुलेशन हालाँकि हर महीने की जाती है, लेकिन इसके बावजूद, ब्याज को EPF खाते में हर महीने ट्रांसफर न कर मौज़ूदा फाइनेंशियल वर्ष के मार्च महीने की 31 तारीख को ही ट्रान्सफर किया जाता है
  • ट्रान्सफर की गई ब्याज को अगले महीने यानी अप्रैल की शेष राशि के साथ मिला लिया जाता है और फिर कुल राशि पर ब्याज
    की कैल्कुलेशन की जाती है
  • यदि लगातार छत्तीस महीनों तक EPF अकाउंट में योगदान न किया जाये, तो अकाउंट निष्क्रिय हो जाता है
  • वे कर्मचारी जिनकी उम्र रिटायर्मेंट की नहीं हुई है उनके निष्क्रिय खातों पर भी ब्याज दिया जाता है
  • रिटायर हुए कर्मचारियों के निष्क्रिय खातों में जमा राशि पर ब्याज नहीं दिया जाता है
  • निष्क्रिय खातों पर कमाए गए ब्याज पर EPF खाताधारक की टैक्स स्लैब दर के अनुसार टैक्स लगेगा
  • नियोक्ता/ कंपनी द्वारा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के लिए किए गए योगदान पर, कर्मचारी को कोई ब्याज नहीं मिलेगा। 58 वर्ष की आयु के बाद इस राशि से पेंशन का भुगतान किया जाता है।
Provident Fund
Provident Fund

EPF योगदान: ईपीएफ अकाउंट के लिए आपकी कितनी सैलरी करेगी?

इनके द्वारा योगदान मासिक योगदान प्रतिशत (%)
कर्मचारी 12/10*
नियोक्ता/ कंपनी 12**
कुल 24%

EPF योगदान के बारे में मुख्य बिंदु:

  • कम्पनी के 12% के योगदान में 3.67% EPF व 8.33% EPS शामिल होता है
  • कर्मचारी द्वारा किया गया योगदान पूरी तरह से कर्मचारी के भविष्य निधि (प्रोविडेंट फंड) में जाता है
  • 10% EPF शेयर उन संगठनों/ कंपनियों के लिए वैलिड है जहां 20 या 20 से कम कर्मचारी काम करते हैं या जिनका नुकसान (फाइनेंशियल वर्ष के अंत में) उनकी कुल संपत्ति के बराबर या ज़्यादा हुआ है या जिन्हें औद्योगिक और फाइनेंशियल रेज़ोल्यूशन बोर्ड द्वारा बीमार (Sick) घोषित किया गया है।
  • उपरोक्त योगदान के अलावा, EDLI के लिए अतिरिक्त 5% का कम्पनी द्वारा भुगतान किया जाता है।
  • EDLI के लिए1% और EPF के लिए 0.01% की दर से निर्धारित प्रशासनिक लागत को कम्पनी वहन करती है। इसका मतलब है कि कंपनी को इस योजना के लिए वेतन का कुल 13.61% योगदान करना होगा।

EPF में कर्मचारी का योगदान

 कर्मचारी के लिए योगदान दर सामान्यतः 12% निर्धारित है। हालाँकि, निम्नलिखित संगठनों के लिए यह दर 10% है:

  • जिस संगठन अथवा फर्म में कर्मचारियों की अधिकतम संख्या 19 हो
  • जिन उद्योगों को BIFR द्वारा बीमार उद्योग घोषित किया गया हो
  • जिन संगठनों का नुकसान (फाइनेंशियल वर्ष के अंत में) उनकी कुल संपत्ति से ज़्यादा हुआ है
  • कॉयर, ग्वारगम, बीड़ी, ईंट और जूट उद्योग
  • ऐसे संगठन जो 6,500 रु. की आय सीमा से कम पर संचालित हो रहे हों

EPF में नियोक्ता/कंपनी का योगदान

नियोक्ता/ कंपनी का न्यूनतम राशि का योगदान 15,000 रु. पर 12% होता है (हालांकि वे अपनी इच्छा से अधिक का योगदान कर सकते हैं)। ये राशि 1800 रु. प्रतिमाह बैठती है। इसका अर्थ है कि इस योजना के लिए नियोक्ता/ कंपनी और कर्मचारी दोनों को हर महीने 1800 रु. का योगदान करना होगा। शुरुआत में यह राशि 6500 रु. पर 12% निर्धारित थी जिसके अंतर्गत नियोक्ता/कंपनी और कर्मचारी दोनों को 780 रु. का योगदान करना होता था।

  • दोनों पक्षों के योगदान को EPFO (कर्मचारी भविष्य निधि संगठन) में जमा किया जाता है
  • यह एक फण्ड है जिसकी सहायता से कर्मचारी रिटायर्मेंट के बाद भी एक बेहतर जीवन जी सकते हैं।

EPF योग्यता शर्तें

ईपीएफ अकाउंट खोलने (Eligibility for EPF Account) की शर्तें निम्नलिखित हैं:

  • इस योजना का लाभ लेने के लिए कर्मचारियों को योजना का एक्टिव सदस्य बनने की ज़रूरत है
  • किसी कंपनी/संगठन को जॉइन करने के दिन से ही कर्मचारी भविष्य निधि, बीमा लाभ के साथ- साथ पेंशन लाभ प्राप्त करने के लिए सीधे योग्य होते हैं
  • जिस संस्थान/ कंपनी में कम से कम 20 लोग काम कर रहे हैं, उसे अपने कर्मचारियों को EPF का लाभ देना अनिवार्य है
  • यह योजना जम्मू और कश्मीर में लागू नहीं है

कंपनी /नियोक्ता EPF के लिए रजिस्ट्रेशन कैसे करें

 एपीएफ रजिस्ट्रेशन (EPF Registration) के लिए नीचे दिए गए तरीके का पालन करें:

  • कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) वेबसाइट पर जाएँ
  • ‘Establishment Registration’ का सेक्शन खोलें जिसके बाद एक नया पेज खुलेगा जिसमें ‘Instruction Manual’ होगा। इसमें कंपनी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया के बारे में डिटेल दी जाएगी, जिसके बाद कंपनी के DSC [डिजिटल हस्ताक्षर प्रमाण पत्र] का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा जो कि नया आवेदन जमा करने के लिए एक ज़रूरी शर्त है
  • आगे बढ़ने के लिए ‘I have read the instruction manual’ टिकबॉक्स पर क्लिक करें और रजिस्ट्रेशन के लिए जानकारी भरें
  • इसके बाद एक ईमेल ई-लिंक भेजा जाएगा जिसे एक्टिव करना होगा और साथ ही मोबाइल पिन भी भेजी जाएगी। रजिस्टर करने के लिए आपको रजिस्टर करने के लिए आपको कुछ दस्तावेज़ अपलोड करने होंगे
  • जो पहले से रजिस्टर्ड हैं वे अपने यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) का उपयोग करके लॉग इन कर सकते हैं

EPF सदस्य (कर्मचारी) EPF में कैसे लॉगइन कर सकते हैं?

आपको EPF की सदस्य वेबसाइट पर जाना होगा और दाईं ओर, आपको एक विकल्प दिखाई देगा जिसमें आप UAN का उपयोग करके लॉग-इन कर सकते हैं। 

UAN क्या है?

यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) 12 अंकों का एक नम्बर है जो EPFO के प्रत्येक सदस्य को प्रदान किया जाता है जसके माध्यम से वह अपने सभी PF खातों को मैनेज कर सकता है। इससे आप सभी प्रोविडेंट फंड (PF) की जानकारी एक ही स्थान पर प्राप्त कर सकते हैं, भले ही आप किसी भी संगठन/ कंपनी के लिए काम करते हों। UAN की मदद से कर्मचारी आसानी से पैसे निकाल सकता है और ट्रांसफर भी कर सकता है।

EPF UAN एक्टिवेशन

अपने यूएएन को एक्टिव (Active Your UAN) करने के लिए, निम्नलिखित तरीके का पालन करें:

आपको EPF की सदस्य वेबसाइट यानी EPF ई-सेवा/EPF सदस्य पोर्टल पर जाना होगा

नीचे दाईं तरफ आपको ‘Activate UAN’ का विकल्प दिखाई देगा, उस पर क्लिक करें

जैसे ही नया डैशबोर्ड खुलता है, EPFO रिकॉर्ड के अनुसार UAN/ मेंबर आईडी के साथ, आधार नंबर, नाम, जन्मतिथि और मोबाइल नंबर आदि दर्ज करें।

‘कैप्चा’ कोड दर्ज करें जिसके बाद आपको EPFO के साथ अपने रजिस्टर्ड मोबाइल पर एक ऑथराइज़ेशन पिन प्राप्त होगी

UAN को ऑनलाइन वैरिफाई और एक्टिव करने के लिए वन टाइम पासवर्ड (ओटीपी) का उपयोग करें

आपको एक और मैसेज भेजा जाएगा UAN के एक्टिव वैरिफिकेशन के लिए

UAN के एक्टिव हो जाने पर, आप भविष्य निधि के स्टेटस/ स्थिति को चेक करने के लिए इसका उपयोग करने लॉग-इन कर सकते हैं।

EPF केवाईसी अपडेट

ईपीएफ केवाईसी अपडेट (EPF KYC Update) करने का तरीका निम्नलिखित है:

EPF सदस्य पोर्टल पर जाएं और UAN और पासवर्ड का उपयोग करके लॉग इन करें

जैसे ही नया पेज खुलेगा, ‘Manage’ सेक्शन के तहत ड्रॉपडाउन मेन्यू से केवाईसी पर क्लिक करें

आधार Pan Card, और बैंक दस्तावेजों आदि के नंबर और नाम जैसी जानकारी अपडेट करें

 इसे सेव करें और यह पेंडिंग केवाईसी के रूप में तब तक दिखाई देगा जब तक यह दूसरी तरफ से वैरिफाई नहीं हो जाता है।

EPF बैलेंस कैसे चेक करें?

एक सदस्य नीचे दिए गए आसान तरीके का पालन करके अकाउंट में जमा EPF बैलेंस को ऑनलाइन चेक (Check EPF Balance Online) कर सकता है:

 EPF की वेबसाइट www.epfindia.gov.in पर जाएं

“Services” सेक्शन में “For Employees” पर जाएं

“Member Passbook” विकल्प पर क्लिक करें

अब अपना “UAN”, पासवर्ड और कैप्चा कोड दर्ज करें और अपने EPF खाते में लॉग-इन करें

अपनी पासबुक देखने के लिए “Member ID” चुनें

दस्तावेज़ में संपूर्ण जानकारी के साथ आपकी पासबुक आपकी स्क्रीन पर प्रदर्शित होगी।

EPFOHO <UAN> ENG फॉर्मेट में 7738299899 पर SMS भेजकर भी सदस्य अपना EPF बैलेंस चेक कर सकते हैं

EPF क्लेम के लिए फ़ॉर्म

नीचे दिए गए ईपीएफ फॉर्म (EPF Claim Forms) के माध्यम से कर्मचारी रजिस्ट्रेशन, विदड्रॉअल, पीएफ के ट्रांसफर, मौजूदा ईपीएफ खाते से लोन लेना या कोई अन्य काम भी कर सकते हैं।

EPF फ़ॉर्म EPF फ़ॉर्म का उपयोग डाउनलोड
फॉर्म 13 EPF विड्रॉल ⇩ 
फ़ॉर्म 14 LIC पॉलिसी की ख़रीद ⇩ 
फ़ॉर्म 10D मासिक पेंशन का क्लेम करने के लिए, ⇩ 
फ़ॉर्म 10C EPS के विड्रॉल लाभ / योजना प्रमाण पत्र का क्लेम करने के लिए ⇩ 
फ़ॉर्म 11 EPF अकाउंट ट्रान्सफर के लिए ⇩ 
फ़ॉर्म 19 कर्मचारी भविष्य निधि के अंतिम निपटान के लिए ⇩ 
फ़ॉर्म 20 कर्मचारी की मृत्यु होने की दशा में EPF का अंतिम निपटान करने के लिए ⇩ 
फ़ॉर्म 2 EPF और EPS के लिए घोषणा और नॉमिनी फ़ॉर्म ⇩ 
फ़ॉर्म 5 IF IDLI के अनुसार क्लेम करने के लिए ⇩ 
फ़ॉर्म 15 G EPF पर ब्याज आय पर TDS बचाने के लिए ⇩ 
फ़ॉर्म 5 EPF और EPS के लिए रजिस्ट्रेशन करने वाले नए कर्मचारियों के लिए ⇩ 
फ़ॉर्म 11 EPF का ऑटो ट्रांसफर ⇩ 

EPF विड्रॉल: EPF अकाउंट से पैसे कैसे निकालें?

ईपीएफ अकाउंट से कुछ राशि या कुल राशि निकाली जा सकती है। जब कोई व्यक्ति रिटायर होता है या 2 महीने से अधिक समय तक बेरोज़गार रहता है तो वह पूरा पैसा निकाल सकता है। आपको किसी काम या आर्थिक इमरजेंसी में पैसे की ज़रूरत पड़ सकती है, ऐसी परिस्थितियों में भी EPF से कुछ पैसा निकालने की अनुमति है। आप ऑनलाइन EPF विड्रॉल फॉर्म भरकर विड्रॉल का क्लेम कर सकते हैं। हालांकि, आप ऑनलाइन विड्रॉल क्लेम सुविधा का उपयोग तभी कर सकते हैं जब आपके UAN से आपका  Aadhar Card लिंक हो।

EPF विड्रॉल फॉर्म भरने और ऑनलाइन क्लेम शुरू करने के लिए निम्नलिखित तरीके का पालन करें: –

अपने UAN और पासवर्ड के साथ UAN मेंबर पोर्टल में लॉग-इन करें

 टॉप मेन्यू बार से ‘Online Services’ टैब पर क्लिक करें और ड्रॉप-डाउन मेन्यू से ‘Claim (Form-31, 19 & 10C)’ चुनें

सदस्य विवरण स्क्रीन पर प्रदर्शित किया जाएगा। अपने बैंक खाते के अंतिम 4 अंक दर्ज करें और ‘Verify‘ पर क्लिक करें

अंडरटेकिंग सर्टिफिकेट पर हस्ताक्षर करने के लिए ‘Yes’ पर क्लिक करें और आगे बढ़ें

अब ‘Proceed for Online Claim’ विकल्प पर क्लिक करें

अपने फंड को ऑनलाइन निकालने के लिए ‘PF Advance (Form 31)’ चुनें

 फॉर्म का एक नया सेक्शन खुलेगा, जिसमें आपको ‘Purpose for which advance is required’, आवश्यक राशि और कर्मचारी का पता चुनना होगा

यह ध्यान देने योग्य है कि सभी विकल्प जिनके लिए कर्मचारी विड्रॉल के लिए योग्य नहीं है, का उल्लेख लाल रंग में किया जाएगा।

 वैरिफिकेशन पर टिक करें और अपना आवेदन जमा करें

जिस उद्देश्य के लिए आपने फॉर्म भरा है, उसके आधार पर आपको स्कैन किए गए दस्तावेज़ जमा करने पड़ सकते हैं

आपकी कम्पनी को आपके विड्रॉल रिक्वेस्ट को स्वीकार करना होगा जिसके बाद आपके EPF खाते से पैसा निकाला जाएगा और विड्रॉल फॉर्म भरने के समय जिस बैंक खाते की जानकारी आपने दर्ज की थी, उसमें जमा किया जाएगा।

EPFO के साथ रजिस्टर्ड आपके मोबाइल नंबर पर एक SMS आएगा। एक बार क्लेम प्रोसेस होने के बाद, राशि आपके बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी। हालांकि EPFO द्वारा इस बाबत कोई औपचारिक समय सीमा प्रदान नहीं की गई है, पैसा आमतौर पर 15-20 दिनों के भीतर जमा हो जाता है। Provident Fund

EPFO सदस्यों को COVID-19 आपातकाल से निपटने के लिए दो बार EPF खाते से पैसे निकालने की अनुमति देता है

श्रम मंत्रालय ने घोषणा की है कि कोरोनावायरस महामारी के कारण उत्पन्न होने वाले आपातकालीन खर्चों को पूरा करने के लिए EPF सदस्य अब अपने EPF खाते से दो बार पैसे निकाल सकते हैं। सदस्य 3 महीने के अपने मूल वेतन और महंगाई भत्ते या अपने ईपीएफ खाते में उपलब्ध राशि का 75%, जो भी कम हो, का हिस्सा निकाल सकते हैं। यह राशि नॉन- रिफंडेबल होगी। इसके अलावा, ईपीएफओ रकम निकालने के दावों को 3 दिनों के भीतर निपटान करेगा और उन सदस्यों के लिए एक ऑटो- क्लेम सेटलमेंट प्रक्रिया भी तैयार की गई है, जिनकी केवाईसी सभी तरह से पूर्ण है। Provident Fund

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EPF को ऑनलाइन ट्रांसफर कैसे करें?

अपने UAN और पासवर्ड का उपयोग कर के EPFO सदस्य पोर्टल पर लॉग इन करें

 होम पेज के मेन मेनू में “Online Services” टैब पर जाएं और ऑनलाइन ट्रांसफर रिक्वेस्ट जनरेट करने के लिए “Transfer Request” का विकल्प चुनें

इसके बाद आपको स्क्रीन पर एक नया डैशबोर्ड नज़र आएगा जिसमें आपकी समस्त व्यक्तिगत जानकारी होगी। अब जन्मतिथि, EPF और शामिल होने की तिथि इत्यादि सभी सूचनाओं को वेरिफाई करें

वेरिफिकेशन के बाद स्टेप 1 पर जाएं, पिछले या वर्तमान नियोक्ता/ कंपनी के विकल्प का चयन करें और फिर पिछले नियोक्ता/कंपनी को जानकारी प्रदान करें जिसके माध्यम से आप क्लेम करना चाहते हैं

जानकारी दर्ज करें  जिसके बाद आपके रजिस्टर मोबाइल नंबर पर एक OTP भेजा जाएगा। आपको OTP दर्ज करके अपनी पहचान को प्रमाणित करना होगा, उसके बाद ही आपकी रिक्वेस्ट को सबमिट किया जाएगा और एक ऑनलाइन भरा हुआ फॉर्म जेनरेट होगा। फॉर्म पर हस्ताक्षर करके अपने वर्तमान या पिछले नियोक्ता/ कंपनी को भेज दें

 नियोक्ता/ कंपनी को भी EPF ट्रांसफर रिक्वेस्ट का एक ऑनलाइन नोटिफिकेशन प्राप्त होगा। आपके नियोक्ता/ कंपनी द्वारा आपके रोज़गार विवरणों को वेरिफाई करके EPFO के क्लेम को डिजिटल रूप से ही फॉरवर्ड करने के बाद ही EPFO ऑफिस आपके क्लेम को प्रोसेस करेगा

रिक्वेस्ट को सबमिट करने के बाद, आप “Online Services” मेनू के तहत “Track Claim Status” मेनू में जाकर अपने EPF ट्रांसफर क्लेम का स्टेटस चेक कर सकते हैं। Provident Fund

EPF अकाउंट के साथ आधार को ऑनलाइन कैसे लिंक करें?

आप आसानी से अपने आधार को अपने ईपीएफ खाते से ऑनलाइन लिंक (Link Aadhar Card with EPF Account) कर सकते हैं। इसके लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन करें:

ईपीएफओ सदस्य पोर्टल पर जाएं और अपनी UAN नंबर या पासवर्ड का उपयोग करके लॉगिन करें

 मेनू बार से ‘Manage’ विकल्प पर जाएं

ड्रॉप-डाउन लिस्ट से, ‘KYC’ विकल्प चुनें

दस्तावेजों की लिस्ट से ‘आधार’ का चयन करें

आधार के अनुसार अपना आधार नंबर और नाम दर्ज करें

सेव करें और आगे बढ़ें

आपका आधार डेटा यूआईडीएआई के डेटा के साथ वेरिफाई किया जाएगा

सफलतापूर्वक मंज़ूर होने पर, आपका आधार आपके ईपीएफ खाते से लिंक हो जाएगा और आप अपनी आधार डिटेल तके सामने वेरिफाइड स्टेटस लिखा देख सकते हैं। Provident Fund

EPF टैक्स नियम

ईपीएफ डिपॉज़िट और ब्याज को वर्ष 2020 तक पूरी तरह से टैक्स फ्री किया गया था। हालांकि, बजट 2021 में, सरकार ने घोषणा की है कि यदि EPF और VFC (स्वैच्छिक भविष्य निधि) में डिपॉज़िट एक फाइनेंशियल वर्ष में 2.5 लाख रुपये से अधिक है तो ऐसे में 2.5 लाख रुपये से ऊपर के योगदान पर अर्जित ब्याज पर टैक्स लगेगा।

EPF कस्टमर केयर नंबर

ईपीएफ से संबंधित किसी भी सवाल या समस्या के लिए ईपीएफ कस्टमर केयर (EPF Customer Care) से संपर्क कर सकते हैं:

सहायता केंद्र  1800118005 (टोल फ्री)

प्रधान कार्यालय:

भविष्य निधि भवन,
14, भीकाजी कामा प्लेस,
नई दिल्ली- 110066

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EPF संबंधी शिकायत दर्ज करना

 EPFO के पास अपना शिकायतें दर्ज करने संबंधी एक सिस्टम भी है जहां सदस्य अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं।

  • सदस्य gov.in पर ‘Register Grievance’ टैब पर क्लिक करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं
  • सदस्यों को अपनी शिकायत दर्ज़ कराने के साथ- साथ अपने अकाउंट से संबंधित सभी प्रासंगिक जानकारी भरनी होगी
  • शिकायत से संबंधित फाइलें साइट पर अपलोड की जा सकती हैं
  • सदस्य ‘View Status’ टैब पर क्लिक करके भी शिकायत के स्टेटस को ट्रैक कर सकते हैं कि शिकायत मंज़ूर हुई या नहीं, उसको हल करने की प्रोसेस कहां तक पहुंची आदि। Provident Fund

EPF योजना के लाभ

EPF योजना, भारतीय कर्मचारियों के लिए उपलब्ध सर्वाधिक विस्तृत और सर्वाधिक व्यापक बचत योजनाओं में से एक है। योजना के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:

लम्बी अवधि की आर्थिक सुरक्षा: इस खाते में जो धनराशि जमा होती है, उसे आप अपने रोज़मर्रा के कामों के लिए आसानी से निकाल नहीं सकते हैं और आपके पैसे की बचत हो रही होती है।

रिटायर्मेंट की अवधि: इस योजना के तहत संचित राशि का उपयोग कर्मचारी के रिटायर्मेंट के समय किया जा सकता है। इससे कर्मचारी को पैसे की बचत और सुरक्षा संबंधी राहत मिलती है।

इमरजेंसी: किसी भी प्रकार की विषम परिस्थिति में कर्मचारी समय से पहले भी इस फण्ड का उपयोग कर सकते हैं। इस योजना में कुछ विशेष मामलों में इस तरह की समय-पूर्व निकासी की व्यवस्था की गई है। Provident Fund

बेरोज़गारी/इनकम लॉस: यदि किसी कारणवश कर्मचारी की वर्तमान नौकरी चली जाती है, तो इस फंड का उपयोग खर्चों को पूरा करने के लिए किया जा सकता है।

नौकरी छोड़ने पर: नौकरी छोड़ने के एक महीने बाद कर्मचारी अपने EPF फंड का 75% और बेरोजगारी के 2 महीने बाद शेष 25% निकालने के लिए स्वतंत्र है।

मौत: कर्मचारी की मृत्यु के मामले में, ब्याज के साथ इकट्ठा की गई राशि कर्मचारी के नॉमिनी को दी जाती है जिससे परिवार को कठिन परिस्थितियों का सामना करने में मदद मिलती है।

कर्मचारी की विकलांगता/शारीरिक अक्षमता: यदि कर्मचारी काम करने की हालत में नहीं है, तो वह इस फण्ड का उपयोग इस स्थिति में कर सकता है।

छंटनी:

 नौकरी से अचानक हटा देने पर कर्मचारी तब तक इस फंड का उपयोग कर सकता है, जब तक उसे कोई उपयुक्त नई नौकरी नहीं मिल जाती।

पेंशन योजना: नियोक्ता/ कंपनी न केवल पीएफ फंड में योगदान करता है; बल्कि कर्मचारी की पेंशन के लिए भी आवश्यक योगदान करता है; जिसका उपयोग कर्मचारी द्वारा रिटायर्मेंट के बाद किया जा सकता है। Provident Fund

बीमा योजना: इसमें कुछ विशेष प्रावधान भी किए गए हैं; जिनके तहत यदि सामूहिक बीमा कवर मौजूद नहीं है तो; नियोक्ता/कंपनी को ;कर्मचारी के जीवन बीमा के लिए भी कुछ योगदान करने की आवश्यकता होती है; यह योजना सुनिश्चित करती है कि कर्मचारियों का समुचित बीमा कराया जाए।

हर जगह आसानी से उपयोग: अपने यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) की मदद से; कर्मचारी EPF सदस्य पोर्टल पर जाकर आसानी से अपने पीएफ अकाउंट को एक्सेस कर सकते हैं; यदि वे नौकरी बदलते हैं, तो वे अपने खाते को भी ट्रांसफर कर सकते हैं।

क्या होता है GPF?

जनरल Provident Fund (GPF) सरकारी कर्मचारियों के लिए होता है; एक सरकारी कर्मचारी अपनी सैलरी का एक निश्चित हिस्सा; योगदान के रूप में देकर इसका सदस्य बन सकता है; इस फंड में जमा राशि सरकारी कर्मचारी को रिटायरमेंट के समय मिल जाती है. GPF पर फिलहाल 7.9 फीसदी ब्याज मिलता है; अगर कोई सरकारी कर्मचारी सस्पेंड हो जाता है तो; वह GPF में जमा नहीं कर सकता है; कर्मचारी के रिटायरमेंट से तीन महीने पहले GPF अकाउंट बंद हो जाता है; सरकारी कर्मचारी इसके एवज में एडवांस लोन भी उठा सकता है; जिसके बदले उसे ब्याज नहीं चुकाना होता है. लोन की राशि EMI के रूप में चुकानी होगी.

क्या होता है PPF?

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) एक स्मॉल सेविंग स्कीम है; इसे बैंक और पोस्ट ऑफिस में खोले जा सकता है; यह छोटी बचत योजनाओं में निवेश का एक साधन है; पब्लिक प्रोविडेंट फंड किसी कर्मचारी तक सीमित नहीं है; बल्कि देश का कोई भी नागरिक इसे खुलवा सकता है; बच्चों के नाम पर भी पीपीएफ खुलवाया जा सकता है; फिलहाल, PPF पर 7.9 फीसदी ब्याज मिलता है; पीपीएफ में निवेश इनकम टैक्स के सेक्शन 80C के तहत आता है; पीपीएफ में निवेश करने पर टैक्स बेनिफिट मिलता है; मैच्योरिटी के समय भी कोई टैक्स नहीं देना पड़ता. भारत सरकार की गारंटी होती है.

कैसे मिलता है लोन?

पीएफ में जमा होने वाले पैसों पर मिलने वाले लोन को PPF Loan कहा जाता है; आप पर्सनल लोन की तरह इस लोन में पैस नहीं ले सकते; इसके लिए आपको जमा राशि के आधार पर पैसा मिलता है; ध्यान रहें अगर आपका पीपीएफ अकाउंट एक्टिव नहीं है तो; आप उस पर लोन नहीं ले सकते. इसके अलावा; जब तक पीपीएफ पर लिया गया पहला लोन चुकता नहीं हो जाता, उस पर दूसरा लोन नहीं लिया जा सकता.

कितने रुपये तक का मिलता है लोन?

आपको बता दें कि यह लोन आपको पीएफ में जमा राशि के आधार पर ही मिलता है.;पीएफ खाता खुलने के दो साल बाद ही इससे लोन लिया जा सकता है; अगर आप एक साल से ही पैसे जमा कर रहे हैं तो आप लोन नहीं ले सकते हैं; आप तीसरे साल में दो साल में जमा राशि का 25 फीसदी ही लोन ले सकते हैं; वहीं, पीएफ अकाउंट ज्यादा दिन से है तो आप इसे पूरा विड्राल भी कर सकते हैं.

कितना लगता है ब्याज?

पहले पीपीएफ पर लोन लेने के लिए खाताधारक को 2 फीसदी ब्याज चुकानी पड़ती थी; लेकिन सरकार ने 2020 के लिए इसे घटाकर एक फीसदी कर दिया है; वैसे यह ब्याज फीसदी होता है; लेकिन पीएफ पर मिलने वाले ब्याज को घटाने के बाद ये रकम 1 फीसदी ही रह जाती है; हालांकि, जितने दिन आप यह लोन लेते हैं, उतने दिन आपको पीएफ एकाउंट पर; सरकार की ओर से मिलने वाला ब्याज नहीं मिलता है

कैसे करें आवेदन?

अगर आप इसके लिए आवेदन करना चाहते हैं तो; इसके लिए आपको फॉर्म डी की आवश्कता होगी; आप अपने बैंक से इसे ले सकते हैं; या बैंक की वेबसाइट से इसे डाउनलोड कर सकते हैं; इसके बाद ये आपको अपने बैंक में जमा करवाना होता है, जिसके बाद लोन का प्रोसेस शुरू हो जाता है.

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