Union Budget Income Tax 2022-23

साधारण शब्दों में बजट Budget सरकार की एक चित्त वर्ष के दौरान होने वाली आय और व्यय का व्यौरा होता है. केंद्र सरकार, बजट के माध्यम से देश को यह बताती है कि उसको किन मदों से आय प्राप्त होगी और वह किन मदों पर कितना खर्च करेगी? इस लेख में हमBudget की परिभाषा, उद्येश्यों और उसके प्रकारों का विवरण दे रहे हैं, जिसकी मदद से आप Budget को और भी अच्छी तरह से समझ सकते हैं.

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 112 में भारत के केन्द्रीय बजट को वार्षिक वित्तीय विवरण के रूप में निर्दिष्ट किया गयाजो कि भारतीय गणराज्य का वार्षिक बजट होता है, जिसे प्रत्येक वर्ष फरवरी के पहले कार्य-दिवस को भारत के वित्त मंत्री द्वारा संसद में पेश किया जाता है। से पहले इसे फरवरी के अंतिम कार्य-दिवस को पेश किया जाता था। भारत के वित्तीय वर्ष की शुरूआत, अर्थात 1 अप्रैल से इसे लागू करने से पहले बजट को सदन द्वारा इसे पारित करना आवश्यक होता है। पूर्व वित्त मंत्री मोरारजी देसाई ने अभी तक सबसे ज्यादा 10 बार बजट प्रस्तुत किया है|

Budget

जब कभी हम “बजट” शब्‍द सुनते हैं तो हमें तुरन्‍त सरकार द्वारा प्रतिवर्ष पेश किए जाने वाले बजट की याद आती है| इस बजट के माध्यम से हम यह जानने की कोशिश करते हैं कि सरकार ने अगले वित्‍त वर्ष के लिए किन चीजों पर कर (Tax) बढ़ाकर उनके मूल्‍य में वृद्धि कर दी है और किन चीजों पर सब्सिडी (Subsidy) के माध्‍यम से अथवा किसी अन्‍य तरीके से मूल्‍य में कुछ कमी करते हुए आम लोगों को राहत दी है.

लेकिन क्या आपको पता है कि बजट का अर्थ क्या होता है और यह कितने तरह का होता है? इस लेख में हम बजट की परिभाषा और उसके वर्गीकरण का विवरण दे रहे हैं, जिससे बजट के संबंध में आपकी समझ और भी विकसित होगी|

“बजट” शब्द अंग्रेजी के शब्द “bowgette” से ली गई है जिसकी उत्पत्ति फ्रेंच शब्द “bougette” से हुई है| “bougette” शब्द भी “Bouge” से बना है जिसका अर्थ चमड़े का बैग होता है| 

Budget एक निश्चित अवधि में सरकार की आय और व्यय का लेखा-जोखा होता है अर्थात बजट में यह बताया जाता है कि सरकार के पास रुपया कहां से आया और कहां गया? बजट भाषण में वित्त मंत्री पूरे देश को यह बताता है कि पिछले, वर्तमान और अगले वित्त वर्ष में उसको किन-किन श्रोतों से पैसा मिला/मिलेगा  है और किन-किन मदों पर खर्च किया जायेगा?

सरकार द्वारा हर साल बजट क्यों बनाया जाता है? 

सरकार हर साल बजट बनाकर दो काम करती है-

1. अगले वित्तवर्ष में देश के विभिन्‍न क्षेत्रों (जैसे- उद्योग, विनिर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन आदि) में किए जाने वाले विभिन्‍न प्रकार के विकास कार्यों में होने वाले खर्चों का अनुमान लगाती है।

2. अगले वित्तवर्ष के लिए अनुमानित खर्चों को पूरा करने के लिए धन (Funds) की व्‍यवस्‍था करने के लिए सम्‍यक उपाय (जैसे- कुछ चीजों पर कुछ खास तरह के नए Tax लगाने या बढ़ाने अथवा किसी वस्तु या सेवा पर पहले से दी जा रही सब्सिडी (Subsidy) को कम या खत्‍म करना आदि) करती है।

यानी सरल शब्‍दों में कहें तो सरकार ये निश्चित करती है कि उसे अगले वर्ष देश के विकास से संबंधित किन चीजों पर प्राथमिकता के साथ खर्च करना है और उन खर्चों के लिए धन की व्‍यवस्‍था कैसे करनी है। आय (Income) व व्‍यय (Expenditure) के इसी ब्‍यौरे का नाम बजट (Budget) है और प्रत्‍येक बजट एक निश्चित अवधि के लिए बनाया जाता है।

बजट के प्रकार (Types of Budget)

बजट मुख्यतः पांच प्रकार के होते हैं, जो निम्न हैं:

1. पारम्परिक या आम बजट (Aam Budget): वर्तमान समय के “आम बजट” का प्रारंभिक स्वरूप “पारम्परिक बजट (Traditional Budget) कहलाता है| आम बजट का मुख्य उद्देश्य “विधयिका” और “कार्यपालिका” पर “वित्तीय नियंत्रण” स्थापित करना है| इस बजट में सरकार की आय और व्यय का लेखा-जोखा होता है| इस बजट में सरकार अगले वित्त वर्ष में किस क्षेत्र में कितना धन खर्च करेगी, उसका उल्लेख तो करती है लेकिन इस खर्च से क्या-क्या परिणाम होंगे उनका ब्यौरा नहीं दिया जाता है|

अतः इस प्रकार के बजट का उद्देश्य सरकारी खर्चों पर नियंत्रण करना तथा विकास कार्यों को लागू करना था न कि तीव्र गति से विकास करना था| अतः पारम्परिक बजट की अवधारणा स्वतंत्र भारत की समस्याओं को सुलझाने तथा विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने में असफल रही| परिणामस्वरूप भारत में “निष्पादन बजट (Performance Budget)” की आवश्यकता और महत्व को स्वीकार किया गया और इसे पारम्परिक बजट के “पूरक” के रूप में पेश किया जाता है| 

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2. निष्पादन बजट (Performance Budget): 

किसी कार्य के परिणामों को आधार मानकर बनाये जाने वाले बजट को “निष्पादन बजट (Performance Budget)” कहते हैं| विश्व में सर्वप्रथम “निष्पादन बजट” की शुरूआत संयुक्त राज्य अमेरिका में हुई थी|

अमेरिका में 1949 में प्रशासनिक सुधारों के लिए “हूपर आयोग” का गठन किया गया था| इसी आयोग की सिफारिश के आधार पर अमेरिका में “निष्पादन बजट” की शुरूआत हुई थी| “निष्पादन बजट” में सरकार जनता की भलाई के लिए क्या कर रही है? कितना कर रही है? और किस कीमत पर कर रही है? जैसी सभी बातों को शामिल किया जाता है| भारत में “निष्पादन बजट” को उपलब्धि बजट या कार्यपूर्ति बजट भी कहा जाता है|

3. शून्य आधारित बजट (Zero Based Budget): 

भारत में इस बजट को अपनाने के दो प्रमुख कारण है:

(i) देश के बजट में लगातार होने वाला घाटा

(ii) निष्पादन बजट प्रणाली का सफल क्रियान्वयन न हो पाना

शून्य आधारित बजट में पिछले वित्त वर्षों में किए गए व्ययों पर विचार नहीं किया जाता है और न ही पिछले वित्त वर्षों के व्यय को आगामी वर्षों के लिए उपयोग किया जाता है| बल्कि इस बजट में इस बात पर जोर दिया जाता है कि व्यय किया जाय या नहीं अर्थात व्यय में वृद्धि या कमी के बजाय व्यय किया जाय या नहीं इस पर विचार किया जाता है|

Zero Based Budget:  में प्रत्येक कार्य का निर्धारण “शून्य आधार” पर किया जाता है अर्थात पुराने व्यय के आधार पर नए व्यय का निर्धारण नहीं किया जाता है बल्कि प्रत्येक कार्य के लिए नए सिरे से नीति-निर्धारण किया जाता है| इस बजट को “सूर्य अस्त बजट (sun set budget)” भी कहा जाता है जिसका अर्थ है कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले प्रत्येक विभाग को शून्य आधारित बजट पेश करना पड़ता है जिसमें विभाग के प्रत्येक क्रियाकलाप का लेखा-जोखा रहता है|

शून्य आधारित बजट का जन्मदाता “पीटर ए पायर” को माना जाता है जिन्होंने 1970 में इसका प्रतिपादन किया था| इस प्रणाली का सर्वप्रथम प्रयोग 1973 में अमेरिका के जार्जिया प्रान्त के बजट में तत्कालीन गवर्नर “जिमी कार्टर” द्वारा किया गया था| बाद में 1979 में अमेरिका के राष्ट्रीय बजट में भी इस प्रणाली को अपनाया गया|

भारत में शून्य आधारित बजट की शुरूआत एक प्रमुख शोध संस्थान “वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद्” (Council of Scientific and Industrial Research) द्वारा किया गया था और केन्द्र सरकार ने 1987-88 के बजट में इस प्रणाली को अपनाया था|

परिणामोन्मुखी बजट (Outcome Budget): 

भारत में हर वर्ष बड़ी संख्या में विकास से संबंधित योजनाएं, जैसे- मनरेगा, एनआरएचएम, मध्याहन भोजन योजना, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, डिजिटल इंडिया, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना आदि शुरू होती हैं| इन योजनाओं में हर वर्ष भारी-भरकम धनराशि खर्च की जाती है| लेकिन ये योजनाएं अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में कहां तक सफल रहीं इसके मूल्यांकन के लिए हमारे देश में कोई खास पैमाना निर्धारित नहीं है| कई बार योजनाओं के लटके रहने से लागत में कई गुना की बढ़ोतरी हो जाती है|

अतः इन कमियों को दूर करने के लिए 2005 में भारत में पहली बार “परिणामोन्मुखी बजट (Outcome Budget)” पेश किया गया था जिसके अंतर्गत आम बजट में आवंटित धनराशि का विभिन्न मंत्रालयों एवं विभागों ने किस प्रकार उपयोग किया उसका ब्यौरा देना आवश्यक था.

परिणामोन्मुखी बजट (Outcome Budget) सभी मंत्रालयों और विभागों के कार्य प्रदर्शन के लिए एक मापक का कार्य करता है जिससे सेवा, निर्माण प्रक्रिया, कार्यक्रमों के मूल्यांकन और परिणामों को और अधिक बेहतर बनाने में मदद मिलती है|

लैंगिक बजट (Gender Budget): किसी बजट में उन तमाम योजनाओं और कार्यकमों पर किया गया खर्च जिनका संबंध महिला और शिशु कल्याण से होता है, उसका उल्लेख लैंगिक बजट (Gender Budget) माना जाता है| लैंगिक बजट के माध्यम से सरकार महिलाओं के विकास, कल्याण और सशक्तिकरण से संबंधित योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए प्रतिवर्ष एक निर्धारित राशि की व्यवस्था सुनिश्चित करने का प्रावधान करती है|.

Indian Union Budget 2022-23

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज अपने बजट में इनकम टैक्स चुकाने वाले करदाताओं को कुछ भी नहीं दिया है. लेकिन पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) में भारी बढ़ोतरी करके आर्थिक विकास की रफ्तार को तेज करने का प्रयास इस बजट में जरूर नजर आता है. इसके साथ ही वित्त मंत्री ने यह अहम ऐलान भी किया कि वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान रिजर्व बैंक (RBI) डिजिटल करेंसी की शुरुआत करेगा. इसके साथ ही निर्मला सीतारमण ने वर्चुअल डिजिटल एसेट्स यानी क्रिप्टो करेंसी और NFT से होने वाली आय पर 30 फीसदी की दर से भारी-भरकम टैक्स लगाने का एलान भी किया है. खास बात यह है कि इस आय में वर्चुअल डिजिटल एसेट्स पर हुए घाटे को सेट-ऑफ भी नहीं किया जा सकेगा.
वित्त मंत्री ने उम्मीद के मुताबिक अपने भाषण में किसानों को काफी अहमियत दी. उन्होंने एलान किया कि देश के किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के तौर पर 7 लाख करोड़ रुपये की रकम दी जाएगी. यह राशि डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर (DBT) के तौर पर किसानों के खातों में सीधे जमा हो जाएगी|

बजट में क्या हुआ महंगा

  • छाता
  • आर्टिफिशियल गहने
  • लाउडस्पीकर
  • हेडफोन और ईयरफोन
  • स्मार्ट मीटर
  • सोलर सेल
  • सोलर मॉड्यूल
  • एक्स-रे मशीन
  • इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों


बजट में क्या हुआ सस्ता

  • हींग
  • कोको बीन्स
  • मिथाइल अल्कोहल
  • सिरका एसिड
  • कटे और पॉलिश किए हुए हीरे
  • सेलुलर मोबाइल फोन के लिए कैमरा लेंस
  • चमड़ा 
  • कपड़ा 
  • पैकेजिंग के समान

Budget 2022: ईज ऑफ डूइंग बिजनेस 2.0 लॉन्च किया जाएगा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि मिनिमम गवर्नमेंट एंड मैक्सिमम गवर्नेंस के प्रति सरकार प्रतिबद्ध है। 1,486 यूनियन कानूनों के निरस्त होने के साथ, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस 2.0 लॉन्च किया जाएगा। हम विश्वास आधारित सरकार के विचार का पालन करेंगे।

आयकर में कोई छूट नहीं, मिडिल क्लास मायूस, कॉरपोरेट को राहत

इस बार के बजट से मिडिल क्लास को मायूसी हुई है। दरअसल, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इनकम टैक्स स्लैब पर कोई नई घोषणा नहीं की। इस वजह से इस बार भी आयकर में कोई छूट नहीं मिली है। वहीं कॉरपोरेट को राहत दी गई है। कॉरपोरेट सरचार्ज 12% से घटाकर 7% किया गया है।

सौर क्षमता के लिए 19,500 करोड़ रूपये का अतिरिक्त आवंटन

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 2030 तक सौर क्षमता के 280 गीगावाट के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए 19,500 करोड़ रूपये का अतिरिक्त आवंटन किया जाएगा।

100 साल के विश्वास का बजट: पीएम मोदी

पीएम नरेंद्र मोदी का कहना है कि ये 100 साल के विश्वास का बजट है. बजट से रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी. बजट का जोर आम लोगों के कल्याण पर है. आधुनिक इंटरनेट कनेक्टिविटी पर जोर रहेगा.

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बजट में शहरीकरण और डिजिटल रुपए पर जोर

नीति आयोग के CEO अमिताभ कांत ने इस बजट को प्रगतिशील बजट बताया है. उनका कहना है कि बजट की सबसे खास बात है कि कैपिटल एक्सपेंडिचर बढ़ाया गया है. पिछले साल 5.54 लाख करोड़ दिए गए थे इसे बढ़ाकर 7.5 लाख करोड़ कर दिया गया है. बजट में MSME पर भी फोकस है. MSME की क्रेडिट गारंटी स्कीम को 4.5 लाख करोड़ से बढ़ाकर 5 लाख करोड़ कर दिया गया है. बजट शहरीकरण, क्लीन इलेक्ट्रिसिटी, क्लीन मोबिलाइजेशन और डिजिटल रुपए पर जोर देने वाला है. क्रिप्टो जैसे वर्चुअल एसेट्स पर प्रतिबंध नहीं लगेगा, इसे एसेट क्लास के रूप में माना जाएगा.

टैक्स ना बढ़ाना सबसे बड़ी राहतः वित्तमंत्री

केंद्रीय बजट पेश करने के बाद वित्तमंत्री ने कहा कि टैक्स ना बढ़ाना सबसे बड़ी राहत है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी टैक्स बढ़ाने के पक्ष में नहीं थे. पिछले साल भी और इस साल भी एक भी पैसा टैक्स बढ़ाकर कर कमाने की कोशिश नहीं की. पीएम का आदेश था कि पिछले साल कि तरह महामारी के समय जनता पर बोझ नहीं डालना है. इस साल भी वही था. इस साल भी हमने कोई टैक्स नहीं बढ़ाया है. 

देश में पहली बार पर्वतमाला स्कीम की शुरुआतः पीएम मोदी

बजट पर अपनी प्रतिक्रिया में पीएम मोदी ने कहा कि देश में पहली बार ऐसा हो रहा है कि पर्वत हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के साथ नॉर्थ ईस्ट के राज्यों के लिए पर्वतमाला स्कीम की शुरुआत हो रही है. इससे इन राज्यों में मॉडर्न ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम, कनेक्टिविटी का आधारभूत ढांचा बनेगा और सीमावर्ती गांव सुदृढ़ होंगे. 

राज्य सरकार के कर्मचारियों का भी NPS में 14 फीसदी अंश अब कर कटौती के दायरे में 

केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना में 14 फीसदी का अंश देती है। हालांकि, राज्य सरकार के कर्मचारी के वेतन का अधिकतम 10 फीसदी हिस्सा ही पेंशन खाते में जाता है। इस भेदभाव को खत्म करने के लिए राज्य सरकार के कर्मचारियों का भी NPS में 14 फीसदी अंश अब कर कटौती के दायरे में आएगा।

बजट 2022: एजुकेशन सेक्टर से जुड़ी घोषणाएं

PM eविद्या के ‘वन क्लास वन TV चैनल’ प्रोग्राम को 12 से बढ़ाकर 200 TV चैनलों तक विस्तृत किया जाएगा. सभी राज्यों को इससे क्लास 1 से 12 तक क्षेत्रीय भाषाओं में पूरक शिक्षा देने में मदद मिलेगी. राज्यों को कृषि विश्वविद्यालयों का पाठ्यक्रम संशोधित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि प्राकृतिक, जीरो-बजट और ऑर्गेनिक फार्मिंग के साथ आधुनिक दौर की खेती की जरूरतों को पूरा किया जा सके.

क्रिप्टो करेंसी, NFT से आय पर 30 फीसदी टैक्स

क्रिप्टो करेंसी और NFT जैसे वर्चुअल डिजिटल एसेट्स के बारे में Budget में बड़ा एलान हुआ है. बजट में वित्त मंत्री ने कहा कि क्रिप्टो करेंसी और NFT से होने वाली आय पर 30 फीसदी की दर टैक्स लगेगा. इनमें होने वाले लेनदेन पर 1 फीसदी टीडीएस भी लगाया जाएगा. इसके अलावा डिजिटल एसेट्स के ट्रांसफर पर हुए नुकसान को मुनाफे से सेट-ऑफ भी नहीं किया जा सकेगा.

कैपिटल गुड्स के आयात पर 7.5% इंपोर्ट ड्यूटी लगेगी

कैपिटल गुड्स पर इंपोर्ट ड्यूटी में मिल रही छूट हटाई गई. कैपिटल गुड्स के आयात पर अब 7.5 फीसदी की दर से इंपोर्ट ड्यूटी लगेगी.

LTCG टैक्स पर 15 फीसदी से ज्यादा सरचार्ज नहीं

किसी भी LTCG टैक्स पर 15 फीसदी से ज्यादा सरचार्ज नहीं लगाया जा सकता है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन का कहना है कि कोऑपरेटिव सोसायटी, जिनकी आमदनी 1 से 10 करोड़ रुपये के बीच है, उन पर सरचार्ज को 12 से घटाकर 7 फीसदी किया गया है.

NPS खाते पर बड़ी राहत

केंद्रीय और राज्य सरकार के कर्मचारियों में टैक्स डिडक्शन का अंतर खत्म करने का एलान किया गया है. अब राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए भी NPS खाते में जाने वाली रकम पर टैक्स डिडक्शन की सीमा 10 फीसदी से बढ़कर 14 फीसदी हो गई है|

कॉरपोरेट सरचार्ज घटेगा

कॉरपोरेट सरचार्ज को 12 फीसदी से घटाकर 7 फीसदी किया जाएगा. नए टैक्स सिस्टम में अगर कोई टैक्स पेयर अपनी आमदनी को जोड़ना भूल जाता है, तो इसके लिए अब उसके पास 2 साल तक समय होगा कि वह अपडेटेड रिटर्न भर सके.

राजकोषीय घाटा GDP के 6.9% के बराबर रहेगा

बजट के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2021-22 में राजकोषीय घाटा GDP के 6.9% के बराबर रहेगा. पहले 6.8% रहने का अनुमान था.

राजकोषीय घाटा GDP के 6.9% के बराबर रहेगा

Budget के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2021-22 में राजकोषीय घाटा GDP के 6.9% के बराबर रहेगा. पहले 6.8% रहने का अनुमान था. वित्त वर्ष 2022-23 में राजकोषीय घाटा GDP के 6.4% के बराबर रहने का अनुमान लगाया गया है. वित्त वर्ष 2025-26 तक सरकार राजकोषीय घाटे को कम करके 4.5% के स्तर तक लाने का इरादा रखती है.

डिजिटल रुपये की होगी शुरुआत

वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान देश में डिजिटल रुपये की शुरुआत किए जाने का एलान किया है उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक द्वारा ‘डिजिटल रुपये’ की शुरुआत करने से देश में करेंसी मैनेजमेंट में काफी सुधार होगा.

MSME सेक्टर के लिए बढ़ा एलान

MSMEs के लिए निर्मला सीतारमन ने कहा कि इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम यानी ECLGS बढ़ाने का फैसला किया गया है. MSMEs में सुधार के लिए 5 वर्षीय प्रोग्राम चलाने की योजना है, जिस पर 6000 करोड़ रुपये की लागत आ सकती है.

डिजिटल भारत के लिए बड़े एलान

वित्त मंत्री ने डिजिटल भारत के लिए बड़े एलान किए हैं. कौशल विकास और आजीविका से संबंधित डिजिटल इकोसिस्टम लॉन्च किए जाएंगे. राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम बनाने के लिए एक ओपन प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा.

डिफेंस सेक्टर के लिए बड़ा एलान

डिफेंस सेक्टर के लिए बड़ा एलान हुआ है. डिफेंस सेक्टर में कैपेक्स का 68 फीसदी हिस्सा भारतीय कंपनियों के लिए सुरक्षित होगा.

पीएम आवास योजना के लिए 48000 करोड़

पीएम आवास योजना के लिए 48000 करोड़ दिए जाने का एलान हुआ है. पीएम आवास योजना में 80 लाख नए मकान बनाए जाएंगे.

रोजगार बढ़ाने पर सरकार का फोकस

Deloitte India के पार्टनर ताप्ती घोष का कहना है कि MSME सेक्टर में रोजगार क्षमता, ई-कौशल, रोजगार सृजन और भर्ती पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है. यह हाल के दिनों में बेरोजगारी की बढ़ोतरी को अच्छी तरह से दर्शाता है.

पोस्ट ऑफिस-बैंक जोड़े जाएंगे

पोस्ट ऑफिस-बैंक आपस में लिंक किए जाएंगे. इससे आपस में पैसों का लेन-देन हो सकेगा. 2022 में डाकघरों में कोर-बैकिंग की शुरुआत होगी.

नई पीढ़ी की 100 वंदे भारत ट्रेनें होंगी डेवलप

गतिशक्ति योजना के तहत वित्त मंत्री ने रेलवे के लिए भी एलान किए हैं. अगले 3 सालों में नई-पीढ़ी की 100 वंदे भारत ट्रेनें विकसित की जाएंगी. वहीं इस दौरान 100 नए कार्गो टर्मिनल बनाए जाएंगे. स्थानीय कारोबार को बढ़ावा देने के लिए ‘एक स्टेशन, एक उत्पाद’ की सोच को बढ़ावा दिया जाएगा. पीपीपी मॉडल से रेलवे का विस्तार किया जाएगा.

PLI स्कीम से 60 लाख नई नौकरियां की संभावना

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन का कहना है कि PLI स्कीम को अच्छी सफलता मिली है. इससे अगले 5 साल में 60 लाख नई नौकरियां पैदा होने की संभावना है. इसके अलावा 30 लाख करोड़ के अतिरिक्त प्रोडक्शन की उम्मीद है.

वित्त मंत्री ने बताए विकास के 4 पिलर

Finance Minister ने बजट के दौरान विकास के 4 पिलर गिनाए हैं. इसमें 1 साल में 25000 किलोमीेटर हाईवे बनाना है. हेल्थ इंफ्रा को मजबूत करना. 25 साल के लिए ग्रोथ का ब्लूप्रिंट तैश्यार करना शामिल है. उनका कहना है कि देश की ग्रोथ सभी अर्थव्यवस्थाओं में सबसे ज्यादा रहने का अनुमान है.

कल 11 बजे बजट के विषय पर बात करेंगेः पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि बुधवार को भारतीय जनता पार्टी के एक कार्यक्रम में बजट पर अपनी बात रखूंगा और उसमें बजट से संबंधित दूसरी बातों पर अपनी बात रखूंगा. उन्होंने कहा कि इस बजट का हर क्षेत्र ने स्वागत किया है, इस बजट से गांव-गांव तक इंटरनेट पहुंचाने में मदद मिलेगी. 

गंगा किनारे नैचुरल फॉर्मिंग को बढ़ावा दिया जाएगाः पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि गंगा किनारे नैचुरल फॉर्मिंग को बढ़ावा दिया जाएगा. एमएमपी खरीद के माध्यम से किसानों के खाते में सवा दो लाख रुपये से ज्यादा ट्रांसफर का प्रावधान बजट में किया गया है. 

ये बजट सभी वर्गों को न्याय देने वाला हैः रामदास अठावले
केंद्रीय बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए रामदास अठावले ने कहा कि मैं बजट को सपोर्ट करता हूं और कहूं कि विकास की गंगा है. विरोधी दल वालों, कांग्रेस मत लो, मोदी सरकार से पंगा. ये बजट सभी वर्गों को न्याय देने वाला है. बजट को सपोर्ट करता हूं. विकास देने वाला बजट है. 

BUDGET 2022: किसानों को फसलों के दाम पर क्या दिया? राकेश टिकैत की प्रतिक्रिया

उत्तर प्रदेश के जनपद मुजफ्फरनगर में बजट पर मीडिया से बात करते हुए बीकेयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि आस तो हर Budget से रहती है कि कुछ ना कुछ किसान को, गांव को, मजदूर को, दुकानदार को मिलेगा. और छात्रों को मिलेगा, बड़ा पैसा हेल्थ और एजुकेशन में खर्च हो रहा है, इसमें कितना दे रहे हैं, बिजली पर बहुत पैसा जा रहा है, उन्होंने कहा कि अगर खर्चा कम हो जाए तो हर आदमी सोचता है कि भारत सरकार ने जो बजट दिया है, वह ठीक रहा कि किसान की एमएसपी गारंटी कानून बन जाए। खरीदारी होगी, लेकिन उसमें व्यापारी घुस गया, वह 500, 600, 800 पर कुंतल का फर्क रहता है. व्यापारी लूट खसोट करता है.

सस्ते में खरीदकर महंगे में बेचता है, यह बड़ी जालसाजी है. ऑर्गेनिक हेल्थ के लिए ठीक है, इसको बढ़ावा देना चाहिए, उसकी मार्केट को बढ़ावा दें और जो जैम स्वीट्स हैं, उसे पूर्ण रूप से बंद करें. वह केमिकल की तो बात करते हैं, लेकिन जैम कि नहीं करते हैं, क्योंकि जैम को बढ़ावा देते हैं. और केमिकल को बंद करने की बात कर रहे हैं. 

पीएम आवास का लाभ मिलेगा बिहार कोः सुशील कुमार मोदी

रोजगार का सृजन बजट का मुख्य केंद्र है. ये बजट राज्य केंद्रित नहीं होता है. गरीबों के लिए आवास बनेगा तो हरियाणा पंजाब में नहीं बल्कि बिहार में बनेगा. मनरेगा का सबसे ज्यादा फायदा बिहार को होगा. बजट एक राज्य के लिये केंद्रित नहीं होता है ऐसे तो उड़ीसा वाले, गुजरात वाले कहेंगे कि हमारे लिये कहा है? धान-गेंहू की खरीद हो, पीएम आवास का लाभ बिहार को मिलेगा और सर्वाधिक लाभ बिहार को मिलेगा. 

व्यापार के नजरिए से दो चीजें कंसिस्टेंसी ऑफ पॉलिसी अहमः FICCI 

दिल्ली स्थित FICCI के अध्यक्ष संजीव मेहता ने कहा, ‘व्यापार के नजरिए से दो चीजें कंसिस्टेंसी ऑफ पॉलिसी और कंसिस्टेंसी ऑफ टैक्स रेट महत्वपूर्ण हैं. इसके लिए मैं वित्त मंत्री का धन्यवाद करूंगा कि उन्होंने इसमें ज़्यादा बदलाव नहीं किए. नए टैक्स भी लागू नहीं किए गए.’

गरीब को और गरीब बनाने और रोजगार छीन लेने वाला बजटः मल्लिकार्जुन खड़गे

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे बोले; गरीब को और गरीब बनाने और रोजगार छीन लेने वाला बजट हैं ये; क्रिप्टोकरेंसी को ये तो मानते ही नहीं थे, अब नया लेकर आए हैं. इससे इनका लगाव हो गया. इसके लिए कोई कानून अब तक नहीं है. किसानों की आमदनी कहां दोगुनी हुई. रोजगार के बारे में कुछ नहीं बोला इस बजट में, लोग त्रस्त हैं. पहले 4 करोड़ घर बोला वो तो बने नहीं अब 80 लाख फिर बोल दिया है.

नयी दिल्ली. 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) ;ने मंगलवार को आम बजट पेश करते हुए कहा कि; रिजर्व बैंक की ओर से 2022-23 से ब्लॉकचेन तकनीक का उपयोग करके; ‘डिजिटल रुपया’ (Digital Rupee) पेश करने का प्रस्ताव है; वित्त मंत्री (Nirmala Sitharaman) ने कहा कि निवेश को बढ़ावा देने के लिए; 2022-23 में राज्यों को एक लाख करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी. उन्होंने कहा कि; राज्यों को 2022-23 में जीएसडीपी के चार प्रतिशत तक राजकोषीय घाटे तक की अनुमति होगी; वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 2022-23 में 3.8 करोड़ घरों में; नल के पानी के कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए 60,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं; केंद्रीय बजट 2022-23 पेश करते हुए, उन्होंने यह भी बताया कि; सरकार ने कर प्रोत्साहन का लाभ उठाने के लिए स्टार्टअप्स के लिए निगमन की अवधि को; एक वर्ष बढ़ाकर 31 मार्च, 2023 करने का निर्णय लिया है.

Finance Minister ने यह भी कहा कि; सरकार कर्मचारियों को राज्य सरकार द्वारा एनपीएस; (राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली) में योगदान पर कर कटौती को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 14 प्रतिशत करने का प्रस्ताव करती है; केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को अपने बजट भाषण में कहा कि; कोयला से गैस बनाने की चार पायलट परियोजनाएं शुरू की जाएंगी; कोयले से गैस बनाने के लिए कोयले को आंशिक रूप से हवा, ऑक्सीजन, भाप या कार्बन डाई ऑक्साइड; द्वारा नियंत्रित परिस्थितियों में आंशिक रूप से ऑक्सीकृत किया जाता है; वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए संसद में बजट पेश करते हुए कहा; ‘तकनीकी और वित्तीय व्यवहार्यता के लिए कोयला से गैस बनाने; और उद्योग के लिए आवश्यक रसायनों में कोयले को बदलने के लिए; चार पायलट परियोजनाएं गठित की जाएंगी.’

किस चीज़ पर जोर दिया

उन्होंने कहा कि सरकार रक्षा क्षेत्र में आयात को घटाने; और आत्म निर्भरता को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है; वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वर्ष 2022-23 के आम बजट; को पेश करते हुए लोकसभा में यह बात कही. उन्होंने कहा कि; रक्षा क्षेत्र के लिए 68 प्रतिशत पूंजी को स्थानीय उद्योग के लिए आवंटित किया जाएगा.; वित्तमंत्री ने यह भी कहा कि अनुसंधान एवं विकास प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए; सार्वभौमिक सेवा दायित्व कोष (ओएसओ) का पांच प्रतिशत आवंटित किया जाएगा; सीतारमण ने कहा; ‘सभी गांवों में भारतनेट के तहत ऑप्टिकल फाइबर नेट को बिछाने का अनुबंध; पीपीपी आधार पर दिया जाएगा.’ उन्होंने ध्यान दिलाया कि; विश्व के लिए जलवायु परिवर्तन का जोखिम बाहरी कारक हैं तथा कम कार्बन विकास रणनीति से रोजगार के अवसर खुलेंगे.

केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में विकास को बढ़ावा देने के लिये; ‘पीएम विकास पहल’ नाम की नई योजना शुरू की जाएगी; उन्होंने कहा कि देश की उत्तरी सीमा पर स्थित गांवों को; एक नए जीवंत ग्राम कार्यक्रम के दायरे में शामिल किया जाएगा; ताकि इन गावों में विकास को बढ़ावा दिया सके; वित्त मंत्री ने वित्त वर्ष 2022-23 के लिए बजट पेश करते हुए कहा कि; देश के 112 आकांक्षी जिलों में से 95 प्रतिशत में स्वास्थ्य; और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है; उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय बुनियादी ढांचा; पाइपलाइन में वृद्धि के सात इंजन से संबंधित परियोजनाओं को पीएम गतिशक्ति से जोड़ा जाएगा; वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि निजी कंपनियों द्वारा 5जी मोबाइल सेवाओं की शुरुआत के लिए स्पेक्ट्रम की नीलामी अगले वित्त वर्ष 2022-23 में की जाएगी.

स्वैच्छिक निकासी की समयावधि को दो साल से घटाकर छह महीने किया जाएगा

सीतारमण ने वर्ष 2022-23 का बजट पेश करते हुए कहा कि; कंपनियों के लिए स्वैच्छिक निकासी की समयावधि को; दो साल से घटाकर छह महीने किया जाएगा; उन्होंने अपने बजट भाषण में कहा कि; आपूर्तिकर्ताओं की अप्रत्यक्ष लागत कम करने के लिए गारंटी बांड देने की व्यवस्था को भी लागू किया जाएगा; उन्होंने कहा कि स्वदेशी रेल सुरक्षा एवं क्षमता प्रौद्योगिकी ‘कवच’ के तहत करीब 2,000 किलोमीटर लंबे रेल नेटवर्क को लाया जाएगा. इसके अलावा अगले तीन वर्षों में ‘वंदे-भारत’ श्रेणी की 400 नई ट्रेनों का भी विनिर्माण किया जाएगा

संसद के बजट सत्र का पहला चरण 31 जनवरी से 11 फरवरी तक प्रस्तावित है; इसके बाद विभिन्न विभागों के बजटीय आवंटन पर विचार के लिये अवकाश रहेगा; बजट सत्र का दूसरा चरण 14 मार्च से आरंभ होगा, जो आठ अप्रैल तक चलेगा.

Indian Budget History

स्वतंत्र भारत का प्रथम केन्द्रीय बजट 26 नवम्बर 1947 को आर.के. शनमुखम चेट्टी द्वारा प्रस्तुत किया गया था।[2]

1962-63 के अंतरिम बजट के साथ 1959-60 से 1963-64 के वित्तीय वर्ष के लिए केंद्रीय बजट को मोरारजी देसाई द्वारा प्रस्तुत किया गया।[2] 1964 और 1968 में फरवरी 29 को वे अपने जन्मदिन पर केंद्रीय बजट पेश करने वाले एकमात्र वित्त मंत्री बने। [3] देसाई द्वारा प्रस्तुत बजट में पांच वार्षिक बजट शामिल हैं, अपने पहले कार्यकाल के दौरान एक अंतरिम बजट और दूसरे कार्यकाल के दौरान एक अंतरिम बजट और तीन अंतिम बजट प्रस्तुत किया, इस समय वे वित्त मंत्री और भारत के उप-प्रधानमंत्री दोनों थे।

देसाई के इस्तीफा देने के बाद, उस समय की भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने वित्त मंत्रालय के पदभार को संभाल लिया और साथ ही वित्त मंत्री के पद को हासिल करने वाली एकमात्र महिला भी बन गई। वित्त पोर्टफोलियो को हासिल करने वाले राज्य सभा के पहले सदस्य प्रणव मुखर्जी ने 1982-83, 1983-84 और 1984-85 के वार्षिक बजट को प्रस्तुत किया।[2] वी.पी. सिंह के सरकार छोड़ने के बाद 1987-89 के बजट को राजीव गांधी ने प्रस्तुत किया और मां और दादा के बाद बजट प्रस्तुत करने वाले वे एकमात्र तीसरे प्रधानमंत्री बने।

एन.डी. तिवारी ने वर्ष 1988-89 के लिए बजट प्रस्तुत किया; 1989-90 के लिए एस.बी. चव्हाण, जबकि मधु दंडवते ने 1990-91 के लिए केंद्रीय बजट प्रस्तुत किया; डॉ॰ मनमोहन सिंह भारत के वित्त मंत्री बने; लेकिन चुनाव की विवशता वश उन्होंने 1991-92 के लिए अंतरिम बजट ही प्रस्तुत किय; राजनीतिक घटनाक्रम के कारण, प्रारम्भिक चुनाव को मई 1991 में आयोजित किया गया; जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने राजनीतिक सत्ता को पुनः प्राप्त किया; और वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने 1991-92 के लिए बजट प्रस्तुत किया।

आम बजट

वार्षिक वित्त रिपोर्ट को ‘आम बजट’ कहा जाता है.
– संविधान के ‘अनुच्छेद 112’ में आय-व्यय का लेखा-जोखा है.
– भारत में पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को पेश किया गया था.
– ब्रिटिश सरकार के वित्त मंत्री जेम्स विल्सन ने बजट पेश किया था.
– आरके षणमुखम चेट्टी आजादी के बाद पहले वित्तमंत्री बने.
– आरके षणमुखम चेट्टी ने 26 नवंबर, 1947 को बजट पेश किया था.
– संविधान गठन के बाद पहला बजट 28 फरवरी, 1950 को पेश हुआ था.

भारत का और आजाद भारत का पहला बजट (India’s First Budget)
भारत में पहला बजट 7 अप्रैल 1860 को पेश किया गया था; लेकिन आजाद भारत का पहला बजट उस समय के वित्त मंत्री आर.के. षणमुखम चेट्टी ने 26 नवंबर, 1947 में पेश किया था. 

कैसे तैयार होता है बजट (Budget Preparation)

वित्त मंत्रालय, नीति आयोग और दूसरे मंत्रालय बजट तैयार करते हैं.
– वित्त मंत्रालय खर्च के आधार पर गाइडलाइन जारी करता है.
– अलग-अलग विभागों के बीच फंड देने को लेकर चर्चा होती है.
– बजट बनने की प्रक्रिया सामान्य रूप से सितंबर से शुरू हो जाती है.
– किस विभाग को कितनी रकम मिले वित्त मंत्रालय ब्लूप्रिंट बनाता है.
– अक्टूबर-नवंबर के दौरान अन्य मंत्रालयों के साथ बैठक होती है.

बजट से जुड़े रोचक तथ्य (interesting facts about budget)
– वित्तमंत्री का भाषण सबसे सुरक्षित दस्तावेज होता है.
– बजट से दो दिन पहले छपने के लिए भेजा जाता है.
– हालांकि, इस बार बजट डिजिटल रूप में पेश किया जाएगा.
– बजट की छपाई के दौरान वित्त मंत्रालय के सभी अधिकारी-कर्मचारी दफ्तर में ही रहते हैं.
– स्टाफ को परिवार से भी बातचीत की इजाजत नहीं रहती है.
– बजट से जुड़े लोग और प्रकाशन पर कड़ी नज़र रखी जाती है.

बजट दस्तावेज को मंजूरी
– वित्त मंत्री को बजट की पहली ड्राफ्ट कॉपी दी जाती है.
– बजट ड्राफ्ट पेपर नीले रंग का होता है.
– बजट पेश करने से पहले राष्ट्रपति की अनुमति ली जाती है.
– राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद मंत्रिमंडल के सामने रखा जाता है.
– इसके बाद संसद के दोनों सदनों में पेश किया जाता है.
– आम बजट दो हिस्सों में बंटा होता है.
– पहले हिस्से में आर्थिक सर्वे और नीतियों का ब्यौरा होता है.
– दूसरे हिस्से में प्रत्यक्ष और परोक्ष कर के प्रस्ताव रखे जाते हैं.

प्रधानमंत्री ने किया बजट पेश
देश के इतिहास में ऐसा कई बार हो चुका है; जब खुद प्रधानमंत्री ने बजट पेश किया है. दरअस;, कई ऐसे प्रधानमंत्री हुए हैं जिनके पास वित्त मंत्रालय का भी अतिरिक्त कार्यभार था; इनमें जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी शामिल हैं.

हलवे की रस्म

वित्त मंत्रालय में हलवा खाने की रस्म निभाई जाती है.
– दस्तावेजों की छपाई प्रक्रिया शुरू होने से पहले की रस्म.
– वित्त मंत्री अपने हाथों से अधिकारियों और कर्मचारियों को हलवा बांटते हैं.
– हलवे की रस्म के बाद से बजट पेश होने तक बाहरी संपर्क नहीं.
– बजट पेश होने के बाद वित्त मंत्रालय से बाहर निकलते हैं.

मनमोहन सिंह ने अपने अगले बजट 1992-93 में अर्थव्यवस्था को मुक्त कर दिया; विदेशी निवेश को प्रोत्साहित किया और आयात कर को; कम करते हुए 300 से अधिक प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक किया।

1996 में चुनाव के बाद, एक गैर-कांग्रेसी मंत्रालय ने पद ग्रहण किया; इसलिए 1996-97 के अंतिम बजट को पी. चिदम्बरम द्वारा प्रस्तुत किया गया; जो उस समय तमिल मानिला कांग्रेस से संबंधित थे।

एक संवैधानिक संकट के बाद जब आई. के. गुजराल का मंत्रालय समाप्त हो रहा था; तब चिदंबरम के 1997-98 बजट को पारित करने के लिए संसद की एक विशेष सत्र बुलाई गई थी; इस बजट को बिना बहस के ही पारित किया गया था।

मार्च 1998 के सामान्य चुनाव के बाद जिसमें भारतीय जनता पार्टी केंद्रीय सरकार का गठन करने वाली थी; तब इस सरकार के वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने 1998-99 के अंतरिम और अंतिम बजट को प्रस्तुत किया।

1999 के सामान्य चुनाव के बाद, सिन्हा एक बार फिर वित्त मंत्री बने और वर्ष 1999-2000 से 2002-2003 तक चार वार्षिक बजट प्रस्तुत किया।[2] मई 2004 में चुनाव होने के कारण अंतरिम बजट को जसवंत सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया।

बजट घोषणा का समय

वर्ष 2000 तक; केंद्रीय बजट को फरवरी महीने के अंतिम कार्य-दिवस को शाम 5 बजे घोषित किया जाता था; यह अभ्यास औपनिवेशिक काल से विरासत में मिला था; जब ब्रिटिश संसद दोपहर में बजट पारित करती थी; जिसके बाद भारत ने इसे शाम को करना आरम्भ किया; अटल बिहारी बाजपेयी की एनडीए सरकार (बीजेपी द्वारा नेतृत्व) के तत्कालीन वित्त मंत्री श्री यशवंत सिन्हा थे; जिन्होंने परम्परा को तोड़ते हुए 2001 के केंद्रीय बजट के समय को बदलते हुए प्रातः 11 बजे घोषित किया|

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